मैथिली अस्मिता की पुकार: संजय सरावगी ने नीतीश कुमार को लिखा पत्र, मैथिली अकादमी को फिर से स्वायत्त बनाने की मांग

 

Bihar news: भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखकर मैथिली भाषा, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने आग्रह किया है कि मैथिली अकादमी को उसके पूर्ववत स्वतंत्र और स्वायत्त स्वरूप में बहाल किया जाए, ताकि यह संस्थान फिर से पूरी क्षमता के साथ कार्य कर सके।

संजय सरावगी ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि अंतरराष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन और विद्यापति सेवा संस्थान के प्रतिनिधिमंडल द्वारा सौंपे गए ज्ञापन के आलोक में वे मुख्यमंत्री का ध्यान इस गंभीर विषय की ओर आकृष्ट कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मैथिली अकादमी सिर्फ एक संस्थान नहीं, बल्कि करोड़ों मैथिली भाषियों की सांस्कृतिक पहचान और साहित्यिक धरोहर की प्रतीक है।

गौरवशाली विरासत, ठहरता वर्तमान

प्रदेश अध्यक्ष ने याद दिलाया कि वर्ष 1976 में स्थापित मैथिली अकादमी ने शोध, प्रकाशन और साहित्यिक गतिविधियों के माध्यम से मैथिली भाषा को राष्ट्रीय पहचान दिलाई। अब तक अकादमी द्वारा लगभग 213 महत्वपूर्ण पुस्तकों का प्रकाशन किया गया है, जिनमें से नौ कृतियों को साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। यह उपलब्धि अपने आप में अकादमी की बौद्धिक और साहित्यिक शक्ति को दर्शाती है।

छात्रों और शोधार्थियों की रीढ़ रही अकादमी

पत्र में यह भी रेखांकित किया गया है कि अकादमी की प्रकाशित पुस्तकें बिहार ही नहीं, बल्कि देश के कई विश्वविद्यालयों के स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में शामिल हैं। UPSC, BPSC जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले हजारों छात्र और शोधार्थी भी वर्षों से इन पुस्तकों पर निर्भर रहे हैं।

बंदी के कगार पर संस्थान

संजय सरावगी ने अकादमी की मौजूदा स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि कर्मचारियों को अन्य संस्थानों में प्रतिनियुक्त किए जाने और स्थायी नियुक्तियों के अभाव में यह प्रतिष्ठित संस्था लगभग निष्क्रिय होती जा रही है। उन्होंने चेताया कि यदि शीघ्र हस्तक्षेप नहीं हुआ, तो मैथिली भाषा और साहित्य को अपूरणीय क्षति हो सकती है।

‘संजीवनी आदेश’ की मांग

प्रदेश अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि स्वीकृत पदों पर अध्यक्ष, पदाधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए तत्काल ‘संजीवनी आदेश’ जारी किया जाए, ताकि अकादमी का नियमित और प्रभावी संचालन सुनिश्चित हो सके। उन्होंने इसे करोड़ों मैथिली भाषियों की भावनाओं से जुड़ा विषय बताया।

सरकार से सकारात्मक पहल की उम्मीद

इस मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए संजय सरावगी ने अपने पत्र की प्रतिलिपि उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और शिक्षा मंत्री सुनील कुमार को भी भेजी है। उन्होंने विश्वास जताया कि राज्य सरकार के समयबद्ध और सकारात्मक निर्णय से न सिर्फ मैथिली अकादमी को नया जीवन मिलेगा, बल्कि बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत भी और अधिक मजबूत होगी।