बिहार में ‘मेगा कैबिनेट रीसैट’ की तैयारी! सम्राट सरकार में बड़े बदलाव के संकेत, कई पुराने चेहरों पर संकट
5 मई के बाद बजेगा विस्तार का बिगुल
सूत्रों के अनुसार पश्चिम बंगाल और असम के चुनावी नतीजों के बाद, यानी 5 मई के बाद बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार हो सकता है। फिलहाल सरकार सिर्फ मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्रियों विजय कुमार चौधरी और विजेंद्र प्रसाद यादव के सहारे चल रही है।
पुराने बनाम नए चेहरों की जंग
इस बार कैबिनेट में बड़े फेरबदल के संकेत हैं। माना जा रहा है कि 30 से 40 फीसदी तक नए चेहरों को मौका मिल सकता है, जबकि कई पुराने मंत्रियों की छुट्टी तय मानी जा रही है। हालांकि कुछ समीकरण ऐसे भी हैं जहां 70% पुराने चेहरों को बरकरार रखते हुए सीमित नए चेहरों को जगह दी जा सकती है।
बीजेपी-जेडीयू दोनों में हलचल
एनडीए के भीतर भी हलचल तेज है। बीजेपी अपने कोटे में करीब 40% नए चेहरों को मौका देने की तैयारी में है, जबकि जेडीयू खेमे में भी लगभग 30% बदलाव की चर्चा है। यह साफ संकेत है कि सरकार नई ऊर्जा और संतुलन के साथ आगे बढ़ना चाहती है।
सहयोगी दलों को भी मिलेगा हिस्सा
चिराग पासवान, जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा जैसे सहयोगी दलों की पार्टियों को भी कैबिनेट में प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना है। चर्चा है कि संतोष सुमन जैसे नाम लगभग तय माने जा रहे हैं।
सिर्फ चेहरे नहीं, विभाग भी बदलेंगे
बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सिर्फ नए चेहरों को शामिल करने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि विभागों का भी बड़ा पुनर्गठन करेंगे। लक्ष्य एक ऐसी “कोर टीम” बनाना है जो उनके विकास विजन को तेजी से लागू कर सके।
नई सत्ता संरचना की झलक
सियासी गलियारों में इसे सिर्फ कैबिनेट विस्तार नहीं, बल्कि “नई सत्ता संरचना” का ब्लूप्रिंट माना जा रहा है जहां पुराने दौर की विदाई और नए नेतृत्व की एंट्री साथ-साथ देखने को मिल सकती है।
अब नजरें 5 मई के बाद होने वाले फैसलों पर टिकी हैं, जो बिहार की राजनीति की दिशा और दशा दोनों तय कर सकते हैं।