बिहार में जल्द लागू होगी नई सहकारिता नीति, महिलाओं और युवाओं को मिलेगा आर्थिक सशक्तिकरण का नया मंच
बैठक के दौरान मंत्री राम कृपाल यादव ने कहा कि नई सहकारिता नीति का मुख्य उद्देश्य महिलाओं, युवाओं, किसानों, दलितों, पिछड़े और अति पिछड़े वर्गों को सहकारिता आंदोलन से जोड़कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। उन्होंने कहा कि यह नीति ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ-साथ रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगी।
रोजगार और ग्रामीण विकास को मिलेगी नई गति
मंत्री ने बताया कि नई नीति के तहत पैक्सों के कार्यक्षेत्र का विस्तार किया जाएगा। पेयजल पैकेजिंग, फूड प्रोसेसिंग, डेयरी, पर्यटन, हरित ऊर्जा, टैक्सी सेवा और बीमा जैसे नए क्षेत्रों में सहकारी संस्थाओं को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे गांवों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और युवाओं को स्थानीय स्तर पर आजीविका के साधन उपलब्ध होंगे।
महिलाओं और कमजोर वर्गों पर रहेगा विशेष फोकस
नई नीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाने की योजना है। पैक्स और अन्य सहकारी समितियों में महिलाओं की सदस्यता को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके साथ ही कमजोर और वंचित वर्गों को सहकारिता से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।
जैविक खेती और ग्रामीण उद्यमिता को मिलेगा बढ़ावा
सरकार शहद उत्पादन, मसाला खेती, औषधीय पौधों की खेती और जैविक कृषि को बढ़ावा देने की भी तैयारी कर रही है। सहकारी समितियों द्वारा तैयार उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने के लिए विशेष व्यवस्था विकसित की जाएगी। इसके अलावा राज्य में आदर्श सहकारी गांव विकसित करने की योजना भी बनाई जा रही है।
राष्ट्रीय नीति लागू करने वाला तीसरा राज्य बनेगा बिहार
सहकारिता विभाग के अनुसार, राष्ट्रीय सहकारिता नीति 2025 को अपनाने वाला बिहार, हिमाचल प्रदेश और ओडिशा के बाद देश का तीसरा राज्य होगा। सरकार का मानना है कि यह नीति “सहकार से समृद्धि” के लक्ष्य को गति देने के साथ-साथ विकसित बिहार और विकसित भारत के निर्माण में भी अहम भूमिका निभाएगी।
बैठक में सहकारिता विभाग के सचिव धर्मेंद्र सिंह, अपर सचिव अभय कुमार सिंह सहित विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। नई नीति को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है और जल्द ही इसे लागू किए जाने की संभावना है।