राजस्व व्यवस्था में पारदर्शिता की नई पहल! उत्तर बिहार के अधिकारियों को मिला स्पेशल ट्रेनिंग
• दाखिल-खारिज, म्यूटेशन और ई-सेवाओं को तेज व पारदर्शी बनाने पर फोकस
इस कार्यशाला का उद्देश्य हाल के न्यायालयीन निर्देशों और नए राजस्व कानूनों की जानकारी देकर प्रशासनिक कामकाज को तेज, पारदर्शी और जनहितकारी बनाना था।
“अंचल अधिकारी ही हैं सिस्टम की रीढ़”
कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए अजीव वत्सराज ने कहा कि अंचल अधिकारी राजस्व प्रशासन की रीढ़ होते हैं। उन्होंने सभी अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से कार्य निष्पादन करने और जनता के प्रति जवाबदेह रहने की सलाह दी।
कानून और प्रक्रिया की बारीकियों पर विशेष फोकस
सेवानिवृत्त अपर सचिव विनोद कुमार झा ने अधिकारियों को राजस्व अधिनियमों और नियमों की गहराई से जानकारी दी। उन्होंने भूमि विवादों के त्वरित निपटारे, अभिलेखों की सटीकता और दाखिल-खारिज व म्यूटेशन प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बनाए रखने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि अगर कानून की सही समझ और प्रक्रिया का पालन किया जाए, तो न सिर्फ विवाद कम होंगे, बल्कि आम लोगों का भरोसा भी प्रशासन पर मजबूत होगा।
डिजिटल सेवाओं से आसान होगा काम
कार्यशाला में आनंद शंकर ने ई-गवर्नेंस से जुड़ी सेवाओं जैसे दाखिल-खारिज, परिमार्जन और ई-मापी के प्रभावी उपयोग पर विस्तृत जानकारी दी। अधिकारियों को बताया गया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए कामकाज को और तेज व पारदर्शी बनाया जा सकता है।
समयबद्ध निपटारे पर जोर
अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया गया कि राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों का समय पर निपटारा किया जाए और हर मामले में निष्पक्षता व संवेदनशीलता बरती जाए।
प्रशासन को मिलेगा नया दिशा
इस कार्यशाला को राजस्व प्रणाली में सुधार की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है। उम्मीद है कि इससे जमीन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बढ़ेगी और आम लोगों को राहत मिलेगी।