बिहार का विकास नहीं, गुजरात का फायदा? प्रशांत किशोर का बड़ा हमला, रोजगार से चुनाव तक उठाए तीखे सवाल
‘बिहार के युवा, गुजरात का फायदा’
प्रशांत किशोर ने दावा किया कि पहले 2014 से पहले गुजरात में बिहार के करीब 8 लाख युवा काम करते थे, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर लगभग 20 लाख तक पहुंच गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यही हाल रहा, तो आने वाले वर्षों में यह आंकड़ा और बढ़ सकता है।
उनका कहना है कि बिहार में उद्योग और रोजगार के अवसर नहीं बढ़ने के कारण युवाओं को मजबूरन दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ रहा है, जहां वे कम वेतन पर काम करने को विवश हैं।
‘राज्य में उद्योग नहीं, पलायन ही विकल्प’
पीके ने आरोप लगाया कि बिहार में फैक्ट्रियां और इंडस्ट्री लगाने की दिशा में ठोस प्रयास नहीं हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि यहां की नीतियां ऐसी बन रही हैं, जिससे राज्य के बजाय बाहर के राज्यों को आर्थिक लाभ मिल रहा है।
चुनाव पर भी उठाए सवाल
चुनावी प्रक्रिया को लेकर भी प्रशांत किशोर ने बड़ा दावा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बनाने के लिए लगभग 30 हजार करोड़ रुपये तक खर्च किए गए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव जीतने के लिए कई तरह के तरीके अपनाए गए और अब वही लोग सत्ता चला रहे हैं, जिन्होंने जीत दिलाने में भूमिका निभाई थी।
‘नवनिर्माण अभियान’ से बदलाव का दावा
अपने अगले कदम का संकेत देते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि वे बिहार को बदलने के अपने मिशन पर डटे रहेंगे। इसके लिए जून से ‘नवनिर्माण अभियान’ शुरू किया जाएगा और जनसुराज संगठन को फिर से मजबूत किया जाएगा।
प्रशांत किशोर के इस बयान ने बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है—विकास, रोजगार और चुनावी पारदर्शिता को लेकर आने वाले दिनों में सियासी घमासान और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।