केवल तीन खदानें चालू, बाकी पर खतरा: बिहार में अवैध खनन को लेकर प्रशासन सतर्क

 

Bihar news: बिहार में पांच पत्थर खदानों की खनन अवधि समाप्त होने और उनके पट्टे निरस्त हो जाने के बाद अवैध खनन की आशंका गहराने लगी है। हालात को देखते हुए खान एवं भूतत्व विभाग ने सख्ती बढ़ा दी है और संबंधित जिलों के खनन अधिकारियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश जारी किए हैं।

अवैध खनन पर लगाम लगाने की तैयारी

विभागीय सूत्रों के मुताबिक, केवल कागजी निर्देशों तक ही बात सीमित नहीं रखी गई है। एहतियातन विशेष उड़नदस्ता टीमें गठित की गई हैं, जो बंद हो चुकी खदानों की नियमित निगरानी करेंगी। इन टीमों का मकसद साफ है—किसी भी हाल में अवैध खनन को पनपने से रोकना।

अब सिर्फ तीन खदानों में खनन

पांच खदानों के पट्टे खत्म होने के बाद फिलहाल बिहार में केवल तीन पत्थर खदानों से ही खनन कार्य चल रहा है। इन तीनों खदानों का कुल क्षेत्रफल करीब 37.5 एकड़ बताया गया है। विभाग का मानना है कि खदानों की संख्या कम होने से अवैध गतिविधियों का जोखिम और बढ़ जाता है, इसलिए निगरानी और जरूरी हो गई है।

कहां-कहां खत्म हुए पट्टे

जानकारी के अनुसार, गया जिले में एक और शेखपुरा जिले में सात खदानों को पांच वर्षों के लिए खनन की अनुमति दी गई थी।
    •    गया जिले की एकमात्र खदान का पट्टा 15 दिसंबर 2025 को समाप्त हो गया।
    •    शेखपुरा जिले की चार खदानों में से एक का पट्टा 26 नवंबर 2025, जबकि बाकी तीन के पट्टे दिसंबर 2025 में अलग-अलग तारीखों पर खत्म हुए।

चालू खदानों पर भी पैनी नजर

जो तीन खदानें अभी संचालित हैं, उनमें से दो का पट्टा 13 जून 2026, जबकि एक का पट्टा 16 अगस्त 2026 तक वैध है। विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि इन खदानों पर भी लगातार निगरानी रखी जाएगी।

खान एवं भूतत्व विभाग का साफ कहना है कि अवैध खनन को लेकर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाएगी। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई तय मानी जाएगी, ताकि राज्य में खनन व्यवस्था पारदर्शी और नियंत्रित बनी रहे।