ट्रैफिक चालान पर पटना हाईकोर्ट सख्त: पूछा- जब दूसरे राज्यों में लोक अदालत से निपटते हैं मामले, तो बिहार में क्यों नहीं?
यह टिप्पणी मुख्य न्यायाधीश संगम कुमार साहू की अध्यक्षता वाली पीठ ने एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान की।
जनहित याचिका पर हो रही सुनवाई
दरअसल, यह मामला रानी तिवारी की ओर से दायर जनहित याचिका (PIL) से जुड़ा है। अदालत इस मामले में पहले ही बिहार सरकार और बिहार स्टेट लीगल सर्विसेस अथॉरिटी को नोटिस जारी कर जवाब तलब कर चुकी है।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विकास कुमार पंकज ने अदालत को बताया कि चंडीगढ़ सहित कई राज्यों में लोक अदालत के माध्यम से बड़ी संख्या में ट्रैफिक चालान के मामलों का समाधान किया जाता है।
कई राज्यों में पहले से लागू है व्यवस्था
याचिका में कहा गया कि महाराष्ट्रा, गुजरात, दिल्ली और ओडिशा जैसे राज्यों में यह व्यवस्था पहले से लागू है, जिससे लोगों को जल्दी राहत मिलती है और अदालतों पर बोझ भी कम होता है।
चालान विवाद में लोगों को हो रही परेशानी
याचिका में यह भी दावा किया गया कि बिहार में कई बार परिवहन विभाग की ओर से मनमाने ढंग से ट्रैफिक चालान काट दिए जाते हैं। ऐसे मामलों में आम लोगों के पास उसे चुनौती देने या जल्दी निपटाने का आसान तरीका नहीं होता।
इसके अलावा, बकाया चालान होने की स्थिति में वाहन मालिकों को पोल्युशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट बनवाने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
14 मार्च को राष्ट्रीय लोक अदालत
बताया जा रहा है कि 14 मार्च 2026 को राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजित होने वाली है। ऐसे में अदालत ने इस मुद्दे को गंभीर मानते हुए संबंधित अधिकारियों से विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है।
आपको बता दूँ कि इस मामले की अगली सुनवाई जल्द होने की संभावना है, जिस पर सभी की नजर टिकी हुई है।