वोटर लिस्ट और SIR विवाद पर बिहार में सियासी घमासान तेज, पटना की सड़कों पर कांग्रेस का बड़ा विरोध मार्च, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग
Bihar News: पटना में मतदाता सूची और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध मार्च का ऐलान किया है। पार्टी की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठाई जा रही है।
कांग्रेस के कार्यक्रम के मुताबिक, पार्टी नेता और कार्यकर्ता पटना के आर. ब्लॉक स्थित चाणक्य होटल से राज्य निर्वाचन आयोग की ओर मार्च करेंगे। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम के नेतृत्व में होने वाले इस प्रदर्शन में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं के शामिल होने की बात कही गई है।
कांग्रेस का आरोप है कि मतदाता सूची से जुड़े फैसलों और चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। पार्टी इसी मुद्दे को लेकर बिहार में अपना विरोध दर्ज करा रही है।
14 बार दर्ज हुई आपत्तियों की रिपोर्ट
इस पूरे विवाद को उस रिपोर्ट के बाद और हवा मिली, जिसमें द इंडियन एक्सप्रेस ने दावा किया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कराईं। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ फैसलों और आदेशों को उनकी जानकारी के बिना लिए जाने पर सवाल उठाए थे।
रिपोर्ट में मतदाता पंजीकरण, नाम जोड़ने-हटाने, Form-6 में बदलाव और मतदाता डेटाबेस के केंद्रीकरण जैसे मुद्दों का भी उल्लेख है। दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ कदमों को लेकर ‘अनधिकृत’ और ‘गैरकानूनी’ होने की आपत्ति दर्ज कराई थी।
हालांकि, इन रिपोर्टों के सामने आने के बाद चुनाव आयोग ने कहा कि SIR समेत उसके सभी फैसले पूर्ण आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से लिए गए हैं। आयोग ने आंतरिक मतभेदों से जुड़े सवालों को संस्थागत विचार-विमर्श का हिस्सा बताया।
राहुल गांधी भी उठा चुके हैं सवाल
मतदाता सूची के मुद्दे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी पहले से ही चुनाव आयोग और SIR को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर ‘वोट चोरी’ जैसे गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए हैं। हालांकि, ये राहुल गांधी के राजनीतिक आरोप हैं और चुनाव आयोग ने अपनी ओर से निर्णय प्रक्रिया को सर्वसम्मत बताया है।
अब बिहार कांग्रेस के विरोध मार्च के जरिए यह मुद्दा एक बार फिर पटना की राजनीति के केंद्र में आने वाला है। पार्टी की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने और गिरफ्तारी की मांग भी रखी जा रही है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग अपने फैसलों को पूर्ण आयोग की प्रक्रिया के तहत लिया गया बता रहा है।
ऐसे में SIR, मतदाता सूची और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर बिहार में सियासी बहस और तेज होने के आसार हैं।