कुर्सी जाए पर ताकत कायम: नीतीश को मिला Z+ सुरक्षा घेरा
सुरक्षा घेरा और हुआ अभेद्य
सूत्रों के मुताबिक, गृह मंत्रालय स्तर पर सुरक्षा समीक्षा के बाद यह फैसला लिया गया है। उनके लंबे राजनीतिक करियर, प्रशासनिक फैसलों और संभावित खतरों को देखते हुए सुरक्षा को और मजबूत करने का निर्णय लिया गया। पुलिस मुख्यालय को भेजे गए निर्देश में कहा गया है कि Bihar Special Security Act 2000 के तहत सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त किया जाए।
इस्तीफे की अटकलों के बीच बड़ा फैसला
बताया जा रहा है कि नीतीश कुमार जल्द ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं और 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने वाले हैं। आमतौर पर पद छोड़ने के बाद सुरक्षा में कटौती होती है, लेकिन इस मामले में उल्टा फैसला लिया गया है- जो अपने आप में खास है।
सियासी मायने भी गहरे
इस फैसले ने सियासी गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। कुछ लोग इसे उनके कद और प्रभाव का संकेत मान रहे हैं, तो कुछ इसे आने वाले समय में बड़े राजनीतिक बदलावों की आहट बता रहे हैं।
क्या होती है Z+ सुरक्षा?
Z+ सुरक्षा देश की सबसे हाई-लेवल सुरक्षा व्यवस्था मानी जाती है, जिसमें NSG, CRPF और CISF जैसी एजेंसियों के कमांडो 24 घंटे सुरक्षा में तैनात रहते हैं। यह सुरक्षा आमतौर पर उन्हीं नेताओं को दी जाती है, जिनकी जान को गंभीर खतरा होता है।