बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर ने चला ऐसा दांव, 'शॉटगन' के बाद कायस्थ लॉबी में हलचल तेज!

 

पटना। पटना के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव पर इस समय पूरे देश की नजरें इनायत है. जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने किसी सुरक्षित सीट को चुनने के बजाय भाजपा के इस सबसे मजबूत और अभेद्य किले से अपना पहला चुनावी दांव खेलकर सबको चौंका दिया है. प्रशांत किशोर ने पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट के उपचुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल कर दिया है. अपने पहले चुनावी मुकाबले में उतरते हुए उन्होंने अपनी पत्नी डॉ. जाह्नवी दास और समर्थकों के भारी जनसैलाब के साथ समाहरणालय पहुंचकर पर्चा भरा.

बांकीपुर परंपरागत रूप से बीजेपी का गढ़ रहा है, जहां कायस्थ, वैश्य और सवर्ण मतदाताओं की संख्या निर्णायक भूमिका में रहती है. इन सब के बीच कुछ पुराने चेहरों का पीके के समर्थन में आना, बीजेपी के लिए घंटी बजाने का काम कर सकता है. ऐसे में क्या पटना के बुद्धिजीवी, युवा और सवर्ण समाज के बीच पीके को लेकर एक नई 'अंडरकरंट' चलने की बात क्या सचमुच में सही है? पीके के किस दांव से आसनसोल से टीएमसी सांसद और 'बिहारी बाबू' के नाम से मशहूर शत्रुघ्न सिन्हा ने खुलकर समर्थन देने का ऐलान कर दिया?

शत्रुघ्न सिन्हा जो खुद कायस्थ बिरादरी से आते हैं. उनका पीके के समर्थन देने वाला बयान क्या भाजपा के पारंपरिक वोट बैंक में एक बड़ी लकीर खींच दी है? राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो पटना के राजनीतिक गलियारों और सियासी अड्डों जैसे यूथ क्लब और बुद्धिजीवी मंचों पर पीके चर्चा का विषय बने हुए हैं. शत्रुघ्न सिन्हा के समर्थन देने वाली बात की भी खूब चर्चा हो रही है. बल्कि कई अन्य सवर्ण और कायस्थ नेता परदे के पीछे से पीके को 'मोरल सपोर्ट' दे रहे हैं.

पटना के पॉश इलाकों जैसे कदमकुआं, बोरिंग रोड, और कंकड़बाग में रहने वाले रिटायर्ड आईएएस, आईपीएस और न्यायिक सेवा से जुड़े कई वरिष्ठ सवर्ण चेहरे जन सुराज के 'बिहार बदलो' नैरेटिव से प्रभावित दिख रहे हैं. दूसरी तरफ अभिषेक कुमार बंटी का टिकट कटने के बाद दबी जुबान में चर्चा है कि भाजपा के भीतर का एक धड़ा, जो स्थानीय टिकट वितरण और सांगठनिक फैसलों से नाखुश था, वह भी परदे के पीछे से पीके के संपर्क में है. वे खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं, लेकिन उनके करीबी संगठनकर्ता जन सुराज के डोर-टू-डोर कैंपेन को मजबूती दे रहे हैं.

चूंकि प्रशांत किशोर खुद देश के सबसे बड़े चुनावी रणनीतिकार रहे हैं, इसलिए उनका चुनाव प्रचार पारंपरिक राजनीतिक रैलियों से काफी अलग और आधुनिक होने वाला है. जन सुराज के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, बांकीपुर में पीके के लिए किसी पारंपरिक फिल्मी सितारों की फौज के बजाय 'सोच बदलने वाले' चेहरों को मैदान में उतारा जाएगा. कहा जा रहा है कि शत्रुघ्न सिन्हा, जो टीएमसी के सांसद हैं, उनका पटना में संभावित रोड-शो कायस्थ युवाओं को आकर्षित कर सकते हैं.

युवा एक्टिविस्ट और प्रोफेसर्स पटना यूनिवर्सिटी और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों के युवा प्रोफेसर्स और छात्र नेता पीके के लिए डिजिटल और ग्राउंड कैंपेनिंग संभाल रहे हैं. बांकीपुर सीट पूर्व में भाजपा के नितिन नवीन और उनके पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा का गढ़ रही है. यहां की जनता बेहद पढ़ी-लिखी और शहरी है. प्रशांत किशोर का मुख्य एजेंडा ही यही है कि लोग लालू प्रसाद यादव के डर से भाजपा को या भाजपा के डर से लालू को वोट देना बंद करें. ऐसे में यदि कायस्थ और सवर्ण समाज का एक बड़ा हिस्सा पारंपरिक राजनीति से हटकर पीके के पाले में खड़ा होता है, तो यह चुनाव बिहार की भावी राजनीति का टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है.