प्रीता वर्मा ही रहेंगी DGP! अगले आदेश तक बढ़ा प्रभार, अब किसकी लगेगी मुहर?
Patna: बिहार पुलिस की कमान फिलहाल वरिष्ठ IPS अधिकारी प्रीता वर्मा के हाथों में ही रहेगी। बिहार सरकार ने 1991 बैच की IPS अधिकारी प्रीता वर्मा के पास मौजूद कार्यवाहक DGP के अतिरिक्त प्रभार को अगले आदेश तक बढ़ा दिया है। गृह विभाग की ओर से इस संबंध में अधिसूचना जारी की गई है।
प्रीता वर्मा वर्तमान में बिहार होमगार्ड्स एवं फायर सर्विसेज की DG-cum-Commandant General हैं। उन्हें पूर्व DGP विनय कुमार के अवकाश पर जाने के बाद बिहार DGP का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था। अब विनय कुमार के VRS लेने और राज्य के मुख्य सूचना आयुक्त नियुक्त होने के बाद DGP का नियमित पद खाली है।
अगले आदेश तक DGP का अतिरिक्त प्रभार
गृह विभाग के ताजा आदेश के मुताबिक प्रीता वर्मा अगले आदेश तक कार्यवाहक DGP की जिम्मेदारी संभालती रहेंगी। इससे बिहार पुलिस के शीर्ष पद पर फिलहाल निरंतरता बनी रहेगी।
दरअसल, पूर्व DGP विनय कुमार सितंबर में लंबी छुट्टी पर गए थे। उस दौरान प्रीता वर्मा को DGP का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था। बाद में विनय कुमार ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले ली और उन्हें बिहार का राज्य मुख्य सूचना आयुक्त नियुक्त किया गया।
नियमित DGP के चयन की प्रक्रिया जारी
बिहार में नियमित DGP की नियुक्ति को लेकर प्रक्रिया भी आगे बढ़ चुकी है। राज्य सरकार ने पात्र IPS अधिकारियों की सूची UPSC को भेजी थी। इसके बाद UPSC की ओर से तीन नामों का पैनल तैयार किए जाने की जानकारी सामने आई है। अब अंतिम नियुक्ति पर फैसला राज्य सरकार को करना है।
DGP की रेस में प्रीता वर्मा, बी. श्रीनिवासन और जितेंद्र सिंह गंगवार के नाम प्रमुख रूप से सामने आए हैं। हालांकि अंतिम फैसला सरकार की ओर से होना बाकी है।
प्रीता वर्मा के नाम पर क्यों टिकी नजर?
प्रीता वर्मा का नाम इस पूरी कवायद में इसलिए खास है क्योंकि वह फिलहाल बिहार पुलिस की कमान संभाल रही हैं। वह 1991 बैच की IPS अधिकारी हैं और वरिष्ठता के लिहाज से भी मजबूत दावेदारों में शामिल हैं।
अगर सरकार उन्हें नियमित DGP नियुक्त करती है, तो वह बिहार पुलिस की पहली महिला स्थायी DGP बनने की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कर सकती हैं। हालांकि इस संबंध में अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।
इससे पहले कार्यवाहक DGP का प्रभार मिलने के साथ ही प्रीता वर्मा बिहार पुलिस की कमान संभालने वाली पहली महिला IPS अधिकारी बन चुकी हैं।
बी. श्रीनिवासन भी रेस में
DGP पद के लिए दूसरा प्रमुख नाम बी. श्रीनिवासन का है। 1992 बैच के IPS अधिकारी श्रीनिवासन फिलहाल केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) के DG के पद पर तैनात हैं। इससे पहले वह बिहार में भी महत्वपूर्ण पदों पर काम कर चुके हैं।
केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से बिहार कैडर में वापसी और DGP पद की दौड़ में उनकी संभावित भूमिका को लेकर भी प्रशासनिक हलकों में चर्चा बनी हुई है।
जितेंद्र सिंह गंगवार का भी मजबूत दावा
1993 बैच के IPS अधिकारी जितेंद्र सिंह गंगवार भी DGP पद के प्रमुख दावेदारों में हैं। वह बिहार में लंबे समय तक पुलिस प्रशासन से जुड़े महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं और फिलहाल DG Vigilance की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
ऐसे में सरकार के सामने वरिष्ठता के साथ-साथ प्रशासनिक अनुभव, सेवा अवधि और राज्य पुलिस में काम करने के अनुभव जैसे कई पहलुओं को ध्यान में रखते हुए फैसला लेने की चुनौती है।
अब सरकार के फैसले पर सबकी नजर
प्रीता वर्मा के कार्यवाहक DGP के अतिरिक्त प्रभार को अगले आदेश तक बढ़ाए जाने से साफ है कि नियमित DGP की नियुक्ति में अभी अंतिम फैसला बाकी है। UPSC पैनल की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब निगाहें बिहार सरकार के निर्णय पर टिकी हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार प्रीता वर्मा पर भरोसा कायम रखती है या बी. श्रीनिवासन अथवा जितेंद्र सिंह गंगवार में से किसी एक को बिहार पुलिस की स्थायी कमान सौंपती है। आने वाले दिनों में बिहार पुलिस के नए DGP को लेकर तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है।