बिहार में होम्योपैथिक इलाज को और बेहतर बनाने की तैयारी, 15 जिलों से आए डॉक्टरों को दी जा रही खास ट्रेनिंग
Bihar news: बिहार में आयुष चिकित्सा व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक और कदम बढ़ाया है। मांसपेशियों और हड्डियों से जुड़ी बीमारियों के बेहतर इलाज के लिए होम्योपैथिक चिकित्सकों का दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम मंगलवार से शुरू हुआ। इस ट्रेनिंग में राज्य के अलग-अलग जिलों से आए चिकित्सकों को इलाज की मानक प्रक्रिया और नई तकनीकों की जानकारी दी जा रही है।
राज्य आयुष समिति, बिहार की ओर से राष्ट्रीय आयुष मिशन और आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से आयोजित इस आवासीय प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य मांसपेशी एवं कंकाल संबंधी विकारों के उपचार में गुणवत्ता, एकरूपता और मानकीकरण लाना है।
बीमारी की पहचान से लेकर रेफरल तक की दी जा रही जानकारी
प्रशिक्षण के दौरान चिकित्सकों को मांसपेशी और कंकाल से जुड़ी विभिन्न समस्याओं की सही पहचान, मरीज की स्थिति का आकलन और स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट गाइडलाइन (STG) के अनुसार इलाज की प्रक्रिया समझाई जा रही है।
इसके अलावा चिकित्सकों को नई उपचार पद्धतियों और जरूरत पड़ने पर मरीज को उच्च चिकित्सा केंद्र पर रेफर करने की सही प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी दी जा रही है।
वैभव चौधरी बोले- ट्रेनिंग का फायदा सीधे मरीजों तक पहुंचे
कार्यक्रम का उद्घाटन राज्य आयुष समिति के कार्यपालक निदेशक वैभव चौधरी और प्रशासी पदाधिकारी मो. शफीक ने किया।
इस मौके पर वैभव चौधरी ने कहा कि प्रशिक्षण का मकसद केवल डॉक्टरों की जानकारी बढ़ाना नहीं है, बल्कि इसका वास्तविक लाभ मरीजों तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोगों को बेहतर इलाज मिले, यह सुनिश्चित करना प्राथमिकता है।
उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण पूरा होने के बाद इसके असर का भी मूल्यांकन किया जाएगा। इसके लिए अलग-अलग जिलों में फील्ड विजिट कर मरीजों और आम लोगों से फीडबैक लिया जाएगा। इससे यह पता लगाने की कोशिश होगी कि प्रशिक्षण में दी गई जानकारी और उपचार संबंधी दिशा-निर्देशों को जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी तरीके से लागू किया जा रहा है।
डॉक्टरों को अनुभव साझा करने का भी मौका
प्रशासी पदाधिकारी मो. शफीक ने कहा कि अलग-अलग जिलों से आए चिकित्सकों को प्रशिक्षण के दौरान अपने व्यावहारिक अनुभव एक-दूसरे के साथ साझा करने का अवसर मिल रहा है। विशेषज्ञ चिकित्सकों के जरिए इलाज से जुड़ी नई जानकारियां और अपडेटेड उपचार पद्धतियों की जानकारी भी दी जा रही है।
इसका उद्देश्य यह है कि प्रशिक्षण के बाद चिकित्सक अपने-अपने जिलों में मरीजों को ज्यादा गुणवत्तापूर्ण और प्रभावी होम्योपैथिक उपचार उपलब्ध करा सकें।
तीन चरणों में हो रहा प्रशिक्षण
मांसपेशी एवं कंकाल संबंधी विकारों की स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट गाइडलाइन पर यह प्रशिक्षण कार्यक्रम तीन चरणों में आयोजित किया गया है।
• 8-9 सितंबर: आयुर्वेदिक चिकित्सकों का प्रशिक्षण
• 10-11 सितंबर: यूनानी चिकित्सकों का प्रशिक्षण
• 15-16 सितंबर: होम्योपैथिक चिकित्सकों का प्रशिक्षण
इस तरह आयुष की तीनों चिकित्सा पद्धतियों से जुड़े चिकित्सकों को मानक उपचार व्यवस्था के अनुरूप प्रशिक्षित किया जा रहा है।
कई वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ रहे मौजूद
कार्यक्रम के दौरान निदेशक प्रमुख होम्योपैथिक डॉ. श्याम सुंदर, उप निदेशक होम्योपैथिक डॉ. हरेन्द्र कुमार दास, राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. धनंजय शर्मा, RBTS कॉलेज मुजफ्फरपुर के प्रिंसिपल प्रोफेसर रविन्द्र कुमार सिंह और राज्य आयुष समिति के HMIS प्रबंधक धीरज कुमार समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
राज्य आयुष समिति का कहना है कि मानक उपचार गाइडलाइन के अनुरूप चिकित्सकों की क्षमता बढ़ने से मरीजों को मिलने वाली आयुष सेवाओं में गुणवत्ता और उपचार की एकरूपता को और मजबूत किया जा सकेगा।