सहकारिता नीति 2026 को जमीन पर उतारने की तैयारी तेज, हर जिले में बनेगा मॉडल सहकार ग्राम

 

Bihar News: बिहार में सहकारिता क्षेत्र को आधुनिक और रोजगारपरक बनाने की दिशा में सरकार ने अपनी कवायद तेज कर दी है। सहकारिता मंत्री राम कृपाल यादव ने गुरुवार को विभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर बिहार राज्य सहकारिता नीति, 2026 के क्रियान्वयन की प्रगति का जायजा लिया। मंत्री ने सभी निर्धारित कार्यों को तय समय-सीमा के भीतर पूरा करने और लगातार निगरानी रखने का निर्देश दिया।

बैठक में नीति के तहत गठित कार्य समूहों की प्रगति, सहकारी समितियों के विस्तार, नए व्यवसायिक क्षेत्रों और युवाओं को सहकारिता से जोड़ने की योजनाओं पर चर्चा हुई।

8 कार्य समूहों को मिली समय-सीमा में काम पूरा करने की जिम्मेदारी

सहकारिता नीति को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए विभाग ने आठ कार्य समूह बनाए हैं। इन समूहों को नीति के अलग-अलग हिस्सों पर काम करने की जिम्मेदारी दी गई है।

इनमें कानूनी, डिजिटल और बीमा सुधार से लेकर सहकार ग्राम, उत्पादों की ब्रांडिंग, मार्केटिंग, हरित विकास, प्रशिक्षण, रिसर्च और इन्क्यूबेशन जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इसके अलावा महिला एवं युवा नेतृत्व, कमजोर वर्गों की भागीदारी, बहुउद्देशीय समितियों और ऑनलाइन माध्यम से नई समितियों के गठन पर भी फोकस किया जा रहा है।

मंत्री ने सभी कार्य समूहों को अपने निर्धारित दायित्व समय पर पूरा करने का निर्देश दिया।

हर जिले में विकसित होगा मॉडल सहकार ग्राम

बैठक में हर जिले में एक मॉडल सहकार ग्राम विकसित करने का फैसला प्रमुख रहा। इसके जरिए ग्रामीण इलाकों में सहकारी संस्थाओं के कामकाज और सफल प्रयोगों को एक जगह पर प्रदर्शित करने की योजना है।

अच्छा प्रदर्शन करने वाली सहकारी समितियों की पहचान कर उन्हें प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया गया है, ताकि उनकी कार्यप्रणाली को दूसरे क्षेत्रों में भी अपनाया जा सके।

युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर सहकारिता से जोड़ने पर जोर

सहकारिता क्षेत्र में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए उन्हें जरूरी कौशल प्रशिक्षण देने की योजना पर भी बैठक में जोर दिया गया। विभाग का लक्ष्य सहकारी संस्थाओं के माध्यम से युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के अवसर विकसित करना है।

इसके लिए सहकारिता केंद्रित पाठ्यक्रम, कौशल विकास और प्रशिक्षण व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है।

13 जिलों में सभी पैक्स ने अपनाया Model Byelaws

बैठक में पैक्स के कामकाज से जुड़े Model Byelaws की भी समीक्षा हुई। विभाग के अनुसार अभी तक 13 जिलों में सभी पैक्स द्वारा Model Byelaws अपनाए जा चुके हैं, जबकि अन्य जिलों में इसकी प्रक्रिया जारी है।

PACS HR Policy को लागू करने के लिए भी आवश्यक आदेश जारी करने की प्रक्रिया चल रही है। इसके अलावा पैक्स में Regulatory Compliance और व्यवसाय की निगरानी के लिए प्रखंड, जिला और प्रमंडल स्तर पर तीन-स्तरीय व्यवस्था विकसित की जा रही है। मुख्यालय में अलग अनुश्रवण कोषांग बनाने की कार्रवाई भी जारी है।

मखाना और शहद कारोबार को सहकारिता से जोड़ने की तैयारी

सहकारिता नीति के तहत नए व्यवसायिक क्षेत्रों को विकसित करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। मखाना उत्पादक किसानों को संगठित करने के लिए 60 मखाना उत्पादक सहयोग समितियों का गठन किया गया है।

वहीं, शहद उत्पादन के लिए 144 प्रखंडस्तरीय शहद उत्पादक सहयोग समितियां बनाई गई हैं। राज्य स्तर पर बिहार राज्य शहद प्रसंस्करण एवं विपणन फेडरेशन का भी निबंधन कराया गया है।

सहकारी उत्पादों की मार्केटिंग के लिए 8 यूनियन

सहकारी समितियों के उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए राज्य में आठ प्रमंडलस्तरीय मार्केटिंग यूनियनों का गठन किया गया है। मार्केटिंग फेडरेशन बनाने की प्रक्रिया चल रही है।

इसके साथ ही मार्केटिंग यूनियनों को खाद के थोक कारोबार और Off Season Storage की सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में भी कार्रवाई की जा रही है।

स्कूलों में पढ़ाई जा सकती है सहकारिता

सहकारिता के प्रति जागरूकता बढ़ाने और नई पीढ़ी को सहकारी आंदोलन से जोड़ने के लिए राज्य के स्कूली पाठ्यक्रम में ‘सहकारिता’ को विषय के रूप में शामिल करने की पहल की गई है। इस संबंध में शिक्षा विभाग के सचिव को पत्र भेजा गया है।

इसके अलावा सहकारिता प्रशिक्षण केंद्र, पूसा को त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय, आनंद से संबद्ध कराने की दिशा में भी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

बैठक में सहकारिता विभाग के सचिव धर्मेन्द्र सिंह, अपर निबंधक विकास कुमार बरियार, मनोज कुमार सिंह, संयुक्त निबंधक कामेश्वर ठाकुर, बाबू राजा, निकेश कुमार समेत विभाग के अन्य अधिकारी मौजूद रहे।