ग्रामीण बिहार में आर्थिक क्रांति की तैयारी: 3000 करोड़ की ‘जीविका-3’ से लाखों रोजगार, महिलाओं को मिलेगा नया संबल
विश्व बैंक की साझेदारी, 70:30 फंडिंग मॉडल
परियोजना का क्रियान्वयन वित्तीय वर्ष 2026-27 से शुरू होगा। कुल लागत का 70 प्रतिशत हिस्सा विश्व बैंक और 30 प्रतिशत राज्य सरकार वहन करेगी। ग्रामीण विकास विभाग के अनुसार, इसका उद्देश्य उत्पादकता बढ़ाना, बाजार से जुड़ाव मजबूत करना और छोटे कारोबारों को संगठित ढांचा देना है।
कृषि से लेकर गैर-कृषि तक व्यापक फोकस
जीविका-3 के तहत कृषि उत्पाद, पशुधन, मत्स्य, डेयरी, कुक्कुट, मधुमक्खी पालन और वानिकी जैसे क्षेत्रों में मूल्य श्रृंखला का विकास किया जाएगा। साथ ही गैर-कृषि आधारित उद्यमों- प्रसंस्करण इकाइयों, कोल्ड स्टोरेज, गोदाम, सीड प्लांट, हैचरी और चिलिंग प्लांट जैसी आधारभूत संरचनाओं का निर्माण होगा। डिजिटल प्लेटफॉर्म और ब्रांडिंग के जरिए उत्पादों को बड़े बाजार से जोड़ा जाएगा।
1 हजार संकुल संगठनों को स्वावलंबी बनाने की योजना
परियोजना के तहत राज्य के 1 हज़ार संकुल स्तरीय संगठनों को आत्मनिर्भर बनाया जाएगा। इन संगठनों के जरिए छोटे उद्यमियों को वित्तीय और सामाजिक सेवाएं आसानी से मिलेंगी। मोबाइल बैंकिंग और डिजिटल भुगतान को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे ग्रामीण कारोबारियों की पहुंच और पारदर्शिता बढ़ेगी।
चरणबद्ध खर्च, छह साल का रोडमैप
छह वर्षों में राशि का चरणबद्ध उपयोग होगा:
• 2026-27: 300 करोड़
• 2027-28: 450 करोड़
• 2028-29: 600 करोड़
• 2029-30: 900 करोड़
• 2030-31: 450 करोड़
• 2031-32: 300 करोड़
मंत्री का दावा-रोजगार और महिला सशक्तिकरण में मील का पत्थर
ग्रामीण विकास एवं परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि यह परियोजना जीविका परिवारों और समूहों के लिए क्रांतिकारी बदलाव लाएगी। छोटे-बड़े उद्योगों को मजबूती मिलेगी, लाखों रोजगार सृजित होंगे और विशेषकर महिला सशक्तिकरण की दिशा में नया कीर्तिमान स्थापित होगा।