यूपी में बाढ़ से निपटने की तैयारी तेज, राहत किट से लेकर लाइफ जैकेट तक तैयार; प्रभावित परिवारों तक पहुंच रही मदद
UP News: गंगा, यमुना, रामगंगा और उनकी सहायक नदियों के बढ़ते जलस्तर के बीच उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बाढ़ का खतरा बढ़ रहा है। इसे देखते हुए योगी सरकार ने राहत और बचाव की तैयारियों को तेज कर दिया है। प्रभावित इलाकों में जरूरी सामग्री पहुंचाई जा रही है, जबकि संभावित बाढ़ वाले क्षेत्रों में भी राहत सामग्री और बचाव उपकरण पहले से तैयार रखे जा रहे हैं।
प्रशासन की ओर से संवेदनशील गांवों की निगरानी, राहत शिविरों की व्यवस्था, मेडिकल टीमों की तैनाती और पशुओं के लिए चारे का इंतजाम किया जा रहा है। कानपुर से लेकर वाराणसी और मेरठ से लेकर मिर्जापुर तक जिला प्रशासन को अलर्ट मोड पर रखा गया है।
कानपुर में 1100 राहत किट तैयार
कानपुर में गंगा, यमुना, पांडु, नोन और रिंद नदियों के किनारे बसे 176 संवेदनशील गांवों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन ने इन क्षेत्रों के लिए 35 बाढ़ चौकियां और 101 शरणालय तैयार किए हैं।
बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए 1,100 राहत किट तैयार की गई हैं। प्रत्येक किट में 26 तरह की जरूरी सामग्री रखी गई है। इसके अलावा बचाव कार्य के लिए नावों और प्रशिक्षित टीमों को भी तैयार रखा गया है।
कानपुर में गंगा का जलस्तर 112.130 मीटर दर्ज किया गया है, जो चेतावनी बिंदु से 13 सेंटीमीटर ऊपर बताया गया है।
मेरठ मंडल में भी राहत सामग्री और बचाव उपकरण तैयार
मेरठ मंडल के बागपत में यमुना और हिंडन के किनारे 11 बाढ़ चौकियां सक्रिय की गई हैं और चार राहत स्थल चिन्हित किए गए हैं। गौतमबुद्धनगर में तटबंधों की निगरानी और मरम्मत के साथ मिट्टी की बोरियां, बल्ली और पत्थर का पर्याप्त भंडार रखा गया है।
मुरादाबाद मंडल के जिलों में भी राहत सामग्री वितरण की तैयारियां पूरी की जा रही हैं। बिजनौर में सुरक्षा उपकरण बांटे जा चुके हैं, जबकि मेडिकल और पशु चिकित्सा टीमों को ब्लॉक स्तर पर तैयार रखा गया है।
संभल की गुन्नौर तहसील में आपात स्थिति से निपटने के लिए 52 गोताखोर और 100 आपदा मित्र तैनात किए गए हैं। अमरोहा में पीएसी की 15वीं बटालियन की टीम के साथ 25 स्थानीय गोताखोर भी मुस्तैद हैं।
आगरा मंडल में दवाओं से लेकर पशुओं के चारे तक इंतजाम
आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद और मैनपुरी में भी बाढ़ की आशंका को देखते हुए खाद्य सामग्री और राहत किट की व्यवस्था की गई है। बीमारियों की रोकथाम के लिए हर ब्लॉक स्तर पर रैपिड रिस्पांस टीमें तैनात की गई हैं और आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
पशुओं की सुरक्षा के लिए सुरक्षित स्थानों और गौशालाओं को चिन्हित किया गया है। वहां पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था भी की जा रही है। जरूरत पड़ने पर राहत एवं बचाव कार्य के लिए गोताखोरों, एनडीआरएफ और मोटर बोट्स की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।
वाराणसी में 33,300 लाइफ जैकेट बांटे गए
वाराणसी में बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए 46 राहत शिविर तैयार किए गए हैं। इनमें सदर तहसील में 37, राजातालाब में छह और पिंडरा में तीन शिविर शामिल हैं। इनकी कुल क्षमता करीब 7,392 लोगों की है। इसके अलावा 15 अस्थायी राहत शिविर भी तैयार रखे गए हैं, जिनमें 3,785 लोगों को ठहराया जा सकता है।
जिले में संचालित नावों के नाविकों को अब तक 33,300 लाइफ जैकेट वितरित किए जा चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग ने मेडिकल टीमें तैयार की हैं, जबकि पशुपालन विभाग की ओर से पशुओं के इलाज और चारे की व्यवस्था की गई है।
मिर्जापुर समेत कई जिलों में अलर्ट
मिर्जापुर में 37 बाढ़ चौकियां स्थापित की गई हैं और 50 स्थानों को राहत शिविर के लिए चिन्हित किया गया है। वहीं सहारनपुर, चंदौली, जौनपुर और गाजीपुर समेत अन्य संवेदनशील जिलों में भी प्रशासन को अलर्ट मोड पर रखा गया है।
प्रशासन की ओर से राहत किट, राशन, दवाएं, लाइफ जैकेट, पशुओं के लिए भूसा और चारे की उपलब्धता पर लगातार नजर रखी जा रही है। सरकार का जोर इस बात पर है कि बाढ़ की स्थिति बिगड़ने पर राहत सामग्री प्रभावित परिवारों तक पहुंचाने में किसी तरह की देरी न हो और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए सभी जरूरी संसाधन पहले से उपलब्ध रहें।