पीठासीन अधिकारी सम्मेलन में बोले विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार, कहा– जनता के प्रति जवाबदेही से ही मजबूत होता है लोकतंत्र

 

लखनऊ: बिहार विधान सभा के अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने कहा है कि लोकतंत्र की मजबूती जनता के प्रति विधायिका की जवाबदेही से ही तय होती है। वे 19 से 21 जनवरी तक लखनऊ में आयोजित 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन में शामिल हुए थे। बुधवार को प्लेनरी सत्र में उन्होंने “जनता के प्रति विधायिका की जवाबदेही” विषय पर अपने विचार रखे।

अपने संबोधन में डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता का असली स्रोत जनता होती है और विधायिका का सबसे बड़ा दायित्व जनता के प्रति उत्तरदायी रहना है। उन्होंने बताया कि जवाबदेही के तीन मुख्य आधार हैं – पारदर्शिता, निगरानी और नागरिक सहभागिता।

अध्यक्ष ने कहा कि पारदर्शिता सबसे जरूरी है। सदन की कार्यवाही, बहस, प्रश्नोत्तर और समितियों की रिपोर्ट जितनी खुली और जनता के लिए आसान होंगी, उतना ही लोगों का भरोसा बढ़ेगा। आज तकनीक के जरिए सीधा प्रसारण, डिजिटल रिकॉर्ड और ऑनलाइन जानकारी से जनता और विधान सभा के बीच की दूरी कम हुई है।

उन्होंने बताया कि निगरानी और नियंत्रण भी विधायिका की बड़ी जिम्मेदारी है। सरकार के कामकाज, खर्च और फैसलों की जांच करना विधायिका का काम है। इसके लिए प्रश्नकाल, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव, स्थगन प्रस्ताव और समितियों जैसी व्यवस्थाएं बनाई गई हैं। इनका सही उपयोग होने पर सरकार ज्यादा जवाबदेह बनती है और जनता के हित सुरक्षित रहते हैं।

डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि विधायकों का व्यक्तिगत आचरण भी बहुत मायने रखता है। सदन में चर्चा तथ्यपरक, मर्यादित और जनहित से जुड़ी होनी चाहिए। साथ ही नागरिक सहभागिता भी जवाबदेही को मजबूत करती है। जनसंवाद और मीडिया के जरिए जनता की बात सीधे विधायिका तक पहुंचती है, जिससे लोकतंत्र और मजबूत बनता है।

उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से काम आसान हुआ है और इससे अधिकारों और जिम्मेदारियों दोनों का बेहतर पालन किया जा सकता है।

अंत में उन्होंने कहा कि जवाबदेही कोई औपचारिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक नैतिकता का आधार है। बिहार विधान सभा जनता के विश्वास को बनाए रखने के लिए लगातार काम कर रही है और आगे भी इसी भावना के साथ आगे बढ़ेगी।