कुड़िया कोठी से निकली राहुल गांधी की वोट अधिकार रैली, तेजस्वी-दीपांकर-पप्पू भी साथ
बेतिया: महात्मा गांधी के सत्याग्रह आंदोलन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को याद दिलाते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपनी वोट अधिकार रैली की शुरुआत पश्चिम चंपारण से की। महात्मा गांधी जब पहली बार चंपारण आए थे, तब उन्होंने बेतिया की कुड़िया कोठी में रात बिताई थी। उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए राहुल गांधी ने भी रैली की शुरुआत से पहले गुरुवार देर रात कुड़िया कोठी में ठहराव किया। उनके साथ बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव, भाकपा माले के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य, वीआईपी सुप्रीमो मुकेश सहनी और जन अधिकार पार्टी के प्रमुख पप्पू यादव भी मौजूद रहे।
रोड शो से बढ़ा उत्साह
शुक्रवार सुबह कुड़िया कोठी से रोड शो निकाला गया, जो शहर के हरी वाटिका चौक तक पहुँचा। यहाँ नेताओं ने महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। रोड शो के दौरान जगह-जगह भारी भीड़ उमड़ती रही। हजारों कार्यकर्ता कांग्रेस, राजद, माले और वीआईपी के झंडे-बैनर लेकर शामिल हुए और “वोट चोर गद्दी छोड़ो” जैसे नारे लगाए।
भीड़ इतनी अधिक थी कि राहुल गांधी का काफिला डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर रुके बिना आगे बढ़ गया। पूरे रोड शो के दौरान राहुल गांधी ने बिना संबोधन किए केवल हाथ हिलाकर कार्यकर्ताओं का अभिवादन किया और काफिले के साथ आगे निकल गए।
विपक्षी नेताओं का भाजपा-जदयू पर हमला
हालांकि राहुल गांधी ने मीडिया से कोई बातचीत नहीं की, लेकिन महागठबंधन के अन्य नेताओं ने भाजपा-जदयू गठबंधन पर तीखे वार किए।
• दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा, “वोट अधिकार रैली में जनता का जबरदस्त समर्थन मिल रहा है। यह चुनाव परिवर्तन का चुनाव होगा। इस बार बिहार की जनता भाजपा-जदयू को करारा जवाब देगी और तेजस्वी यादव के नेतृत्व में नई सरकार बनेगी। मोदी जी ढलान पर हैं और राहुल जी उत्थान पर हैं।”
• पप्पू यादव ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “2025 का चुनाव लोकतंत्र का महापर्व है। जनता बदलाव चाहती है। नरेंद्र मोदी की हवा खत्म हो चुकी है। युवाओं, किसानों और आम जनता से पूछिए – वे मोदी सरकार को बेरोजगारी, शिक्षा और किसान विरोधी नीतियों के कारण चोर कह रहे हैं।”
गोपालगंज की ओर कूच
बेतिया से शुरू हुआ यह रोड शो नौतन होते हुए गोपालगंज की ओर बढ़ गया। महागठबंधन की इस संयुक्त ताकत ने रैली के पहले ही दिन माहौल को गर्मा दिया है। राजनीतिक जानकार मान रहे हैं कि गांधी की धरती से शुरू की गई यह रैली आने वाले विधानसभा चुनाव में विपक्ष के लिए मजबूत आधार तैयार करने की कोशिश है।