SSB जवानों की कलाई पर सजी राखी, बगहा में रक्षाबंधन पर दिखा भाईचारे और देशभक्ति का भावुक संगम

 

Bihar news: रक्षाबंधन के मौके पर पश्चिम चंपारण के बगहा स्थित सशस्त्र सीमा बल (SSB) की 21वीं वाहिनी का परिसर भावनाओं और देशभक्ति से सराबोर नजर आया। सीमा की सुरक्षा में तैनात जवानों को जब स्थानीय बहनों और छात्राओं ने राखी बांधी तो माहौल में अपनापन और भाईचारे की तस्वीर देखने को मिली।

21वीं वाहिनी के कमांडेंट तापेश्वर संबित राउत के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में सीमा जागरण मंच के सहयोग से क्राइस्ट मिशन स्कूल, हरनाटांड़ और सनफ्लावर स्कूल की छात्राएं, स्थानीय महिलाएं तथा ब्रह्माकुमारी संस्थान की बहनें शामिल हुईं। सभी ने जवानों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा और उनका मुंह मीठा कराते हुए उनके सुरक्षित एवं स्वस्थ जीवन की कामना की।

राखी बंधवाकर भावुक हुए जवान

रक्षाबंधन का त्योहार जवानों के लिए खास भावुक पल लेकर आया। घर और परिवार से दूर रहकर देश की सीमाओं की सुरक्षा में जुटे जवानों को स्थानीय बहनों से राखी बंधवाकर परिवार जैसा अपनापन महसूस हुआ। जवानों के चेहरों पर खुशी साफ दिखाई दी।

इस दौरान बहनों ने जवानों के दीर्घायु होने और देश सेवा में निरंतर समर्पित रहने की कामना की। वहीं, कार्यक्रम ने स्थानीय नागरिकों और सीमा प्रहरियों के बीच भरोसे एवं आत्मीयता को भी मजबूत किया।

‘रक्षाबंधन विश्वास और सुरक्षा के रिश्ते का प्रतीक’

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कमांडेंट तापेश्वर संबित राउत ने सभी छात्राओं, शिक्षकों, स्थानीय महिलाओं, ब्रह्माकुमारीज की बहनों और अतिथियों के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के रिश्ते तक सीमित त्योहार नहीं है, बल्कि यह समाज में प्रेम, विश्वास और सुरक्षा की भावना को मजबूत करने वाला पर्व है।

उन्होंने कहा कि सीमा प्रहरियों और आम नागरिकों के बीच विश्वास का रिश्ता जितना मजबूत होगा, उतना ही देश की सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। स्थानीय लोगों का स्नेह जवानों के मनोबल को बढ़ाने का काम करता है।

जवानों और नागरिकों के बीच बढ़ी आत्मीयता

रक्षाबंधन के इस आयोजन ने एसएसबी और स्थानीय समुदाय के बीच बेहतर समन्वय और आपसी संबंधों का संदेश दिया। पूरे कार्यक्रम के दौरान वाहिनी परिसर में उत्सव के साथ देशभक्ति का माहौल बना रहा।

आयोजन के अंत में सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया गया। जवानों की कलाइयों पर बंधी राखियां न सिर्फ भाई-बहन के स्नेह की निशानी बनीं, बल्कि सीमा की रक्षा करने वाले जवानों और आम लोगों के बीच मजबूत होते भरोसे का प्रतीक भी नजर आईं।