महिला नेतृत्व का कमाल: रोहतास की रसूलपुर पंचायत बनी ‘मॉडल विलेज’, विकास और सशक्तिकरण की नई मिसाल
महिला नेतृत्व ने बदली तस्वीर
लगभग 45% महिला आबादी वाले इस पंचायत में अनुराधा देवी ने महिला-केंद्रित शासन की मजबूत नींव रखी। उनका लक्ष्य साफ है—स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा और आजीविका के जरिए महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना।
स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा सुधार
पंचायत में 216 गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण किया गया और 100% प्रसवोत्तर जांच सुनिश्चित की गई। संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के कारण मातृ मृत्यु दर सिर्फ 1 और शिशु मृत्यु दर मात्र 2 तक सीमित रही। नियमित पोषण दिवस और जागरूकता अभियानों से स्वास्थ्य स्तर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
शिक्षा में बेटियों का जलवा
यहां शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है। विशेषकर अनुसूचित जाति और जनजाति के बच्चों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। हर साल बेहतर प्रदर्शन करने वाले छात्रों को सम्मानित किया जाता है, जिससे लड़कियों की शिक्षा में भागीदारी तेजी से बढ़ी है।
महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर
रसूलपुर पंचायत में 172 स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं, जिनमें से 162 बैंक से जुड़े हैं। महिलाओं को सिलाई, हस्तशिल्प और कंप्यूटर जैसे प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ा गया है। जीविका योजना के तहत महिलाएं स्कूल ड्रेस सिलकर अच्छी आय अर्जित कर रही हैं।
गांव में ही होता है विवादों का समाधान
महिलाओं की सुरक्षा के लिए ‘शक्ति सलाह केंद्र’ बनाया गया है। दहेज, बाल विवाह और अन्य सामाजिक समस्याओं का समाधान पंचायत स्तर पर ही किया जाता है, जिससे पुलिस तक जाने की नौबत कम हो गई है।
बुनियादी सुविधाओं का हुआ विस्तार
पंचायत में 2,572 शौचालयों का निर्माण, सभी घरों तक सड़क, 100 एलईडी स्ट्रीट लाइट और शुद्ध पेयजल की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। साथ ही विधवा, वृद्धावस्था और दिव्यांग पेंशन योजनाओं का लाभ भी जरूरतमंदों तक पहुंच रहा है।
चुनौतियों को अवसर में बदला
शुरुआत में सामाजिक रूढ़िवाद और महिलाओं की कम भागीदारी बड़ी चुनौती थी, लेकिन जागरूकता अभियान और प्रशिक्षण के जरिए इसे बदला गया। आज महिलाएं न सिर्फ आत्मनिर्भर हैं, बल्कि पंचायत के निर्णयों में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
रसूलपुर पंचायत की यह कहानी बताती है कि अगर नेतृत्व मजबूत हो, तो गांव की तस्वीर बदलते देर नहीं लगती।