रत्नालय ज्वैलर्स को हाईकोर्ट से झटका, दूसरे PAN ने बढ़ाई मुश्किल; इनकम टैक्स का री-असेसमेंट जारी रहेगा
Bihar news: पटना हाईकोर्ट ने रत्नालय ज्वैलर्स से जुड़े आयकर पुनर्मूल्यांकन मामले में फर्म को राहत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने आयकर विभाग की ओर से जारी धारा 148 के तहत री-असेसमेंट नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। अदालत ने माना कि विभाग के पास दोबारा आकलन की प्रक्रिया शुरू करने के लिए प्रथम दृष्टया आधार मौजूद था।
मामले की सुनवाई जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद और जस्टिस सुनील दत्त मिश्रा की खंडपीठ ने की। विवाद में सबसे अहम बिंदु फर्म के नाम से जुड़े दूसरे PAN और उस PAN पर आयकर रिटर्न दाखिल नहीं किए जाने का रहा।
दूसरे PAN ने बढ़ाया मामला
कोर्ट के सामने सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि रत्नालय ज्वैलर्स के पास दो PAN थे। फर्म ने दूसरे PAN को रद्द कराने की कोशिश की थी, लेकिन उससे जुड़े बैंक खातों का इस्तेमाल जारी रहा।
उपलब्ध अदालती विवरण के मुताबिक, दूसरे PAN से जुड़े बैंक खातों में लेनदेन और नकद जमा की जानकारी भी सामने आई थी। विभाग की जांच में करीब 4.59 करोड़ रुपये की संभावित ऐसी आय का मुद्दा उठा, जिसे आकलन से बाहर रहने की आशंका जताई गई।
दूसरे PAN पर रिटर्न दाखिल नहीं हुआ
फर्म की ओर से कोर्ट में पुनर्मूल्यांकन की कार्रवाई का विरोध किया गया। दलील थी कि विभाग के पास दोबारा आकलन शुरू करने के लिए पर्याप्त और प्रासंगिक सामग्री नहीं है।
लेकिन सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि दूसरे PAN के तहत फर्म की ओर से आयकर रिटर्न दाखिल नहीं किया गया था। हाईकोर्ट ने इसी तथ्य को महत्वपूर्ण माना।
अदालत के अनुसार, इस स्थिति में आयकर अधिकारी का यह विश्वास प्रथम दृष्टया निराधार नहीं कहा जा सकता कि कुछ कर योग्य आय आकलन से छूट गई हो सकती है।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
हाईकोर्ट ने साफ किया कि रिट याचिका पर सुनवाई करते समय अदालत का काम यह तय करना नहीं है कि आयकर अधिकारी के पास मौजूद सामग्री कितनी पर्याप्त है या उससे अंतिम तौर पर कितनी आय साबित होती है।
कोर्ट इस स्तर पर मुख्य रूप से यह देखती है कि पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया शुरू करने के लिए कोई प्राथमिक आधार मौजूद है या नहीं। यदि उपलब्ध जानकारी पूरी तरह अप्रासंगिक या अस्पष्ट नहीं है, तो केवल सामग्री की पर्याप्तता के आधार पर नोटिस को रद्द नहीं किया जा सकता।
फर्म की याचिका खारिज
हाईकोर्ट ने रत्नालय ज्वैलर्स की रिट याचिका खारिज कर दी। इसके साथ ही आयकर विभाग की ओर से जारी धारा 148 के नोटिस पर तत्काल रोक लगाने का आधार नहीं रहा।
मामला Ratnalaya Jewellers बनाम Assistant/Deputy Commissioner of Income Tax, Circle-4 से संबंधित है और फैसला 29 सितंबर 2026 को हुआ।
अब आगे क्या होगा?
हाईकोर्ट के आदेश के बाद आयकर विभाग पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकेगा। विभाग दूसरे PAN, उससे जुड़े बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन समेत उन पहलुओं की जांच कर सकता है, जिनके आधार पर री-असेसमेंट की कार्रवाई शुरू की गई थी।
हालांकि, यहां एक बात समझना जरूरी है। हाईकोर्ट के इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि रत्नालय ज्वैलर्स को अदालत ने कर चोरी या किसी वित्तीय गड़बड़ी का दोषी ठहरा दिया है। अदालत ने फिलहाल पुनर्मूल्यांकन नोटिस की वैधता और उसे जारी करने के प्रथम दृष्टया आधार पर फैसला दिया है। अंतिम कर देनदारी या किसी अनियमितता का निर्धारण आगे की आयकर कार्यवाही में रिकॉर्ड और तथ्यों के आधार पर होगा।
कोर्ट के फैसले से क्या साफ हुआ?
इस मामले में हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि यदि आयकर विभाग के सामने ऐसी जानकारी है, जिसके आधार पर उसे लगता है कि कर योग्य आय आकलन से बाहर रह सकती है, तो केवल इस आधार पर कि सामग्री पर्याप्त है या नहीं, रिट स्तर पर पुनर्मूल्यांकन नोटिस को रद्द नहीं किया जाएगा।
रत्नालय ज्वैलर्स के मामले में दूसरे PAN पर रिटर्न दाखिल नहीं किया जाना विभाग की कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण आधारों में से एक रहा। अब आगे की प्रक्रिया में विभाग को उपलब्ध रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन के आधार पर मामले को आगे बढ़ाना होगा।