खत्म नहीं होगा आरक्षण, लेकिन... जेन-जी के सवाल पर संघ प्रमुख ने कोटा सिस्टम पर कर दी बड़ी अपील
Newshaat Desk: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने गुरुवार (06 अगस्त) को दो टूक कहा कि देश में आरक्षण जारी रहेगा. हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जिन लोगों को कोटा सिस्टम यानी आरक्षण प्रणाली से लाभ मिल चुका है, उन्हें दूसरों को भी वही मौके मिलने देना चाहिए और खुद ही आरक्षण का लाभ लेना छोड़ देना चाहिए. उन्होंने आरक्षण को लेकर पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि जब तक सामाजिक भेदभाव है, तब तक आरक्षण जारी रहेगा.
भागवत ने मुंबई के नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर (NMACC) में 'जेन ज़ी (Gen Z) और 'जेन अल्फा' (Gen Alpha) पर केंद्रित एक कार्यक्रम में 2,000 युवाओं को संबोधित करते हुए ये बातें कहीं. इस कार्यक्रम के दौरान, RSS प्रमुख ने हाल ही में हुए छात्र विरोध-प्रदर्शनों के बाद भारत के युवाओं की चिंताओं का जवाब देने की कोशिश की. जब उनसे आरक्षण के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, "जब तक सामाजिक भेदभाव मौजूद है, आरक्षण जारी रहना चाहिए. लेकिन जिन लोगों को पहले ही फ़ायदा मिल चुका है और जिनकी स्थिति बेहतर हो गई है, उन्हें दूसरों को भी वही मौके मिलने देने पर विचार करना चाहिए."
बीकेसी के नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर में जेन-जी और जेन-अल्फा के साथ संवाद करते हुए संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि सरकार में खामियां थी, तभी तो आंदोलन हुआ और आंदोलन तब होता है, जब बातचीत नाकाम हो जाती है. अगर सरकार ने पहले ही बात कर लेती, तो आंदोलन की जरूरत नहीं पड़ती. आंदोलन भी बातचीत का एक तरीका है. संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि जेन-जी और जेन-अल्फा पुरानी पीढ़ी से भी ज्यादा देशभक्त और ईमानदार है. उनकी बात हमें सुननी चाहिए. उनसे बातचीत में कमी थी, इसलिए दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन हुआ.
नीट पेपर लीक के खिलाफ देशभर में प्रदर्शनों के बाद आरएसएस प्रमुख का युवाओं के साथ सबसे यह संवाद बहुत ही महत्वपूर्ण माना जा रहा था. जंतर-मंतर पर 36 दिन चले आंदोलन के बाद आखिरकार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना ही पड़ा. गुरुवार को इंडिया इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस यानी आईआईएमयूएन के 15वीं वर्षगांठ पर आयोजित कार्यक्रम में भागवत ने युवाओं के सवालों का जवाब दिया. भागवत ने कहा कि हम लोग जब जेन-जी की उम्र में थे, तब बड़े बुजुर्ग जो कहते थे. हम मान लेते थे. उस पर सवाल नहीं करते थे. परंतु आज की जेन-जी सवाल करती है. उन्हें जवाब चाहिए और प्यार भी चाहिए. संघ प्रमुख ने आगे कहा कि मैं यह कभी नहीं कहूंगा कि जेन-जी को आंदोलन नहीं करना चाहिए. संविधान ने हमें आंदोलन करने, प्रदर्शन करने का अधिकार दिया है, लेकिन सवाल यह है कि आंदोलन कैसे करना है, यह देखना बहुत जरूरी है. दूसरी बात, आंदोलन हमारे या आपके खिलाफ नहीं, बल्कि सिस्टम में सुधार के लिए होना चाहिए. आंदोलन कोई एंटी-नेशनल नहीं है. जंतर-मंतर पर जो बच्चे आंदोलन कर रहे थे वे भी तो हमारे ही है. हमें उनकी बात और उनकी भावना को समझना चाहिए.
आरएसएस प्रमुख भागवत ने कहा कि आंदोलन में लाठीचार्ज हुआ पर यह क्यों हुआ, किस लिए हुआ, उसका कारण जानना होगा. हमें तय करना होगा कि कहां गड़बड़ी हुई. मैंने अखबार में ही पढ़ा कि आंदोलन में कुछ उपद्रवी शामिल हुए थे. भागवत ने विश्वास के साथ कहा कि अगर मुझे आंख मूंदकर भरोसा करना है, तो मैं जेन-जी पर कर सकता हूं. संघ प्रमुख भागवत ने शिक्षा व्यवस्था पर कहा कि शिक्षा कमर्शियल बिजनेस नहीं है. वह सर्वसुलभ हो, ऐसा इंफ्रास्ट्रक्चर होना चाहिए. ऐसा किसी ने नहीं कहा कि सरकार ही पूरी शिक्षा चलाए. हमें भी सहयोग करना होगा. तभी सुधार होगा. बाद में पाठ्यक्रम की बात आनी चाहिए.
महिलाओं की भागीदारी के बारे में सिर्फ भारत में नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के परिप्रेक्ष्य में यह तय है कि उन्हें आगे आना चाहिए. उन्हें समान अधिकार मिलें, उन्हें बराबरी का हक मिले. सेम-सेक्स मैरिज पर पर भागवत ने कहा कि यह सब चल रहे सिस्टम को छोड़ देना चाहिए, तो दिक्कत पैदा हो जाएगी. अगर आप नया सिस्टम ला रहे हैं, तो पहले सोसाइटी को उसके लिए तैयार करना होगा.
उन्होंने कहा, "मैं आपको सीधे जवाब नहीं दूंगा. मैं आपसे कहूंगा कि आप देखें कि डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर आरक्षण के बारे में क्या सोचते थे. अगर हम ईमानदारी से उनकी सलाह मानें, तो कोई समस्या नहीं है." उन्होंने कहा कि आरक्षण सामाजिक कारणों से है. जब तक सामाजिक भेदभाव रहेगा, आरक्षण जारी रहेगा. जिन्हें यह मिला है और जिनकी हालत बेहतर हुई है, अगर उन्हें लगता है कि उन्हें अब इसकी ज़रूरत नहीं है, तो उन्हें इसे छोड़ देना चाहिए.
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा, "अब बड़े पैमाने पर हमने इसका लाभ उठाया है, हमारी स्थिति अब ठीक है, इसलिए इसे दूसरों को दें. कुछ राज्यों में वर्गीकरण की मांग उठी है, और उच्चतम न्यायालय ने भी हाल ही में इसका ज़िक्र किया है. ऐसा क्यों हुआ? क्योंकि यह सभी को मिलना चाहिए. आरक्षण पाने वालों में एक वर्ग ऐसा भी है जो मानता है कि यह हमारी उन्नति के लिए है. यह कोई स्थायी उपाय नहीं है. हमें इसका फ़ायदा उठाना है, खुद को बेहतर बनाना है और इसे उन लोगों के लिए उपयोगी बनाना है जिन्हें यह अभी तक नहीं मिला है."
भागवत ने आगे कहा कि अगर सिस्टम को ठीक से लागू किया जाए, तो आरक्षण से जुड़ी कई चिंताओं का असरदार ढंग से समाधान किया जा सकता है. उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि इस मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए. इस दौरान भागवत ने सोशल मीडिया के प्रभाव का भी उल्लेख किया और कहा कि केवल कानून बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा. उन्होंने कहा कि नियम तभी प्रभावी होते हैं, जब समाज उन्हें स्वेच्छा से स्वीकार करे. उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रभाव रखने वाले लोगों से जिम्मेदारी निभाने की अपील करते हुए कहा कि उनके कारण उनके अनुयायी को गलत दिशा में नहीं जाने चाहिए.
उन्होंने फर्जी वीडियो और झूठी जानकारियों के बढ़ते खतरे का उल्लेख करते हुए लोगों से अपील की कि किसी भी सामग्री पर विश्वास करने से पहले उसकी विश्वसनीय स्रोतों से पुष्टि करें. मोहन भागवत ने कहा कि सोशल मीडिया के उपयोग में आत्म-अनुशासन जरूरी है, क्योंकि केवल प्रतिबंध लगाने से समस्याएं समाप्त नहीं होतीं, बल्कि वे दूसरे रास्तों से फैलने लगती हैं. संघ प्रमुख ने कहा, "कभी-कभी टकराव खत्म होने के बाद हमें वहीं से आगे बढ़ना होता है जहां हमने छोड़ा था. इसलिए, हमेशा नफ़रत और दुश्मनी बनाए रखना समाधान नहीं है. जब कोई परेशानी आती है, तो हमें उसे संभालना होता है और उसे संभालने का एक तरीका भी होता है. हमें उस तरीके को अपनाना चाहिए."