सड़क सुरक्षा अब अभियान नहीं, आदत बने”- श्रवण कुमार का बड़ा ऐलान, हेलमेट-सीटबेल्ट के साथ नेत्र जांच भी अनिवार्य
• 1800 चालकों की नेत्र जांच, स्वस्थ नेत्र प्रमाण-पत्र होगा अनिवार्य
• छह महादलित महिला बस चालकों को नियुक्ति पत्र
• हर शनिवार निजी बस चालकों की ट्रेनिंग
Bihar news: बिहार में सड़क सुरक्षा को लेकर सरकार ने सख्त और व्यापक पहल शुरू की है। परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने पटना स्थित मुख्य सचिवालय के अधिवेशन भवन में आयोजित सड़क सुरक्षा अभियान 2026 कार्यक्रम में कहा कि “सड़क सुरक्षा सामूहिक जिम्मेदारी है, इसे निभाने से ही सभी सुरक्षित रह सकते हैं।”
उन्होंने बताया कि राज्यभर में अब तक 77,926 शिक्षण संस्थानों में छात्रों, शिक्षकों, कर्मचारियों और वाहन चालकों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जा चुका है। यह अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेगा।
नियम तोड़ने वालों पर सख्ती
वित्तीय वर्ष 2025-26 में हेलमेट और सीटबेल्ट जैसे नियमों का उल्लंघन करने पर 4 लाख 47 हजार रुपये से अधिक का चालान काटा गया है। सड़क सुरक्षा माह के दौरान करीब 1,800 चालकों की नेत्र जांच कर चश्मे भी वितरित किए गए। साथ ही 264 यूनिट रक्तदान कराया गया।
स्कूली वाहन चालकों के लिए नेत्र जांच अनिवार्य
मंत्री ने निर्देश दिया कि सभी सरकारी, निजी और स्कूली वाहन चालकों की नेत्र जांच अनिवार्य की जाए और स्वस्थ नेत्र प्रमाण-पत्र जारी किया जाए। स्कूलों और जिलों में वर्चुअल रियलिटी (VR) मशीन के माध्यम से हेलमेट की उपयोगिता का प्रदर्शन भी किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि एक महीने में रिकॉर्ड 1.40 लाख वाहनों का पंजीकरण और 83 हजार ड्राइविंग लाइसेंस जारी किए गए हैं।
पिंक बस की कमान महिलाओं के हाथ
कार्यक्रम में छह महादलित महिला चालकों—रागिनी कुमारी, सरस्वती कुमारी, आरती कुमारी, बेबी, गायत्री कुमारी और अनीता कुमारी—को हेवी मोटर व्हीकल (HMV) के नियुक्ति पत्र सौंपे गए। बिहार में पहली बार महिलाएं पिंक बस चलाने जा रही हैं, जिसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
गुड सेमेरिटन को सम्मान
सड़क दुर्घटना में घायलों की मदद करने वाले पांच राहवीरों को 25-25 हजार रुपये का चेक, प्रमाण-पत्र और मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया।
परिवहन सचिव राज कुमार ने कहा कि हर शनिवार निजी बस चालकों की ट्रेनिंग आयोजित की जाएगी। उन्होंने युवाओं से अपील की कि स्टंटबाजी जैसी लापरवाही से बचें। जल्द ही सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए कैशलेस उपचार योजना भी लागू की जाएगी।
कार्यक्रम में पुलिस महानिदेशक विनय कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। एसडीआरएफ ने सीपीआर और आपातकालीन उपचार की ट्रेनिंग दी तथा बच्चों को सड़क सुरक्षा की शपथ दिलाई गई।
सरकार का कहना है कि सड़क सुरक्षा केवल एक माह का कार्यक्रम नहीं, बल्कि पूरे साल व्यवहार का हिस्सा बनना चाहिए।