RTI कानून ‘मृत पत्र’ बनने की कगार पर? 28 हजार अपीलों के बैकलॉग पर पटना हाईकोर्ट में जनहित याचिका

 
Bihar news: बिहार में सूचना के अधिकार (RTI) कानून की प्रभावशीलता को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए पटना हाईकोर्ट में एक अहम जनहित याचिका दायर की गई है। यह याचिका अधिवक्ता Praveen Kumar ने दाखिल की है, जिसमें राज्य सूचना आयोग में लंबित मामलों के भारी बैकलॉग पर अदालत का ध्यान आकर्षित किया गया है।

28 हजार से ज्यादा द्वितीय अपीलें लंबित

याचिका में राज्य सूचना आयोग के आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया है कि दिसंबर 2024 तक 28,291 द्वितीय अपीलें लंबित हैं। आरोप है कि द्वितीय अपीलों के निपटारे के लिए कोई तय समय-सीमा नहीं होने के कारण पूरी व्यवस्था सुस्त पड़ गई है।

याचिकाकर्ता का तर्क है कि जहां प्रथम अपील के लिए 45 दिनों की वैधानिक समय-सीमा तय है, वहीं द्वितीय अपील अनिश्चितकाल तक लंबित रहती है। इससे आम नागरिकों का सूचना पाने का अधिकार व्यावहारिक रूप से निष्प्रभावी हो गया है।

कोर्ट से सख्त समय-सीमा तय करने की मांग

जनहित याचिका में हाईकोर्ट से आग्रह किया गया है कि द्वितीय अपीलों के निपटारे के लिए स्पष्ट और बाध्यकारी समय-सीमा तय की जाए। साथ ही संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग भी की गई है, ताकि नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन न हो।

‘सतत परमादेश’ की मांग

याचिका में यह भी अनुरोध किया गया है कि अदालत ‘सतत परमादेश’ जारी करे। यानी कोर्ट केवल एक आदेश देकर मामले को बंद न करे, बल्कि समय-समय पर राज्य सूचना आयोग से रिपोर्ट लेकर पूरी प्रक्रिया की निगरानी करे, जब तक 28 हजार से अधिक लंबित अपीलों का निपटारा न हो जाए।

अगर इस याचिका पर सकारात्मक निर्णय आता है, तो वर्षों से सुनवाई का इंतजार कर रहे हजारों आवेदकों को बड़ी राहत मिल सकती है। अब नजर हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी है, जहां तय होगा कि RTI कानून को नई मजबूती मिलती है या नहीं।