सम्राट कैबिनेट का बड़ा फैसला: AI ट्रेनिंग, 400 ई-बसें, कर्मचारियों को लोन- 20 एजेंडों पर लगी मुहर
सबसे बड़ा फैसला निवेश को लेकर लिया गया, जहां सरकार ने ‘बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज’ की अवधि बढ़ाकर जून 2026 तक कर दी। इससे राज्य में नए उद्योगों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
सरकारी कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों के लिए भी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब उन्हें बैंक और वित्तीय संस्थानों से लोन की सुविधा मिलेगी। साथ ही, तेजी से बदलती तकनीक के दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की ट्रेनिंग देने का भी फैसला लिया गया है, जिससे प्रशासनिक कामकाज को स्मार्ट और प्रभावी बनाया जा सके।
परिवहन क्षेत्र में सरकार ने बड़ा दांव खेलते हुए मुजफ्फरपुर, भागलपुर, गया, दरभंगा और पूर्णिया में 400 नई इलेक्ट्रिक बसों के संचालन को मंजूरी दी है। इससे प्रदूषण कम होगा और पब्लिक ट्रांसपोर्ट को मजबूती मिलेगी।
स्वास्थ्य क्षेत्र में भी अहम फैसला लेते हुए सीतामढ़ी के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल का नाम बदलकर ‘मां सीता चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल’ कर दिया गया। वहीं रेशम उद्योग को बढ़ावा देने के लिए विश्व बैंक से 500 मिलियन डॉलर के लोन को भी मंजूरी दी गई है।
शिक्षा के क्षेत्र में अरवल और शेखपुरा में केंद्रीय विद्यालय खोलने के लिए जमीन हस्तांतरण को हरी झंडी मिली है। वहीं भोजपुर में गंगा कटाव से बचाव के लिए 52 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी दी गई है।
न्याय व्यवस्था को मजबूत करने के लिए दरभंगा के बेनीपुर कोर्ट में 18 नए पदों के सृजन का फैसला हुआ है। इसके अलावा नगर निकाय चुनावों में पारदर्शिता लाने के लिए I-Voting सिस्टम लागू करने की अनुमति दी गई है, जिसकी जिम्मेदारी C-DAC को सौंपी गई है।
साथ ही, सप्तम राज्य वित्त आयोग का कार्यकाल बढ़ाकर 30 सितंबर 2026 तक कर दिया गया है।
यह कैबिनेट बैठक बिहार के लिए एक व्यापक बदलाव का संकेत देती है, जहां सरकार विकास, तकनीक और प्रशासनिक सुधारों के जरिए राज्य को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की तैयारी में है।