लालू की राजद तोड़कर नीतीश के चहेते बन गए थे सम्राट चौधरी, फिर सीएम के साथ हेलिकॉप्टर से उड़ गए
नीतीश ने नरेंद्र मोदी को आगे बढ़ाने के विरोध में 2013 में भाजपा से 17 साल पुराना गठबन्धन तोड़ लिया था। उस समय कांग्रेस, लेफ्ट और कुछ निर्दलीय की मदद से नीतीश ने सदन में बहुमत साबित किया था, लेकिन नंबर का तनाव बना रहता था। ऐसे माहौल में साल 2014 लोकसभा चुनाव से पहले लालू यादव की पार्टी के विधानसभा में चीफ व्हिप सम्राट चौधरी ने राजद के 22 में से 13 विधायकों को तोड़कर सदन में अलग मान्यता मांग ली थी। बाद में 6 विधायक यह बोलकर पलट गए कि उनका दस्तखत फर्जी है या कुछ और बोलकर साइन कराया। सम्राट उस समय परबत्ता विधायक थे और सीएम के हेलिकॉप्टर में सवार होकर अपने इलाके में नीतीश कुमार को लेकर गए थे।
57 साल के सम्राट चौधरी का राजनीतिक करियर कई दलों से होते हुए भाजपा में पहुंचने के बाद ही परवान चढ़ा है। उनके पिता शकुनी चौधरी भी कांग्रेस से समता पार्टी होते हुए राजद, जदयू और हम में रहे। सम्राट का सफर राजद से शुरू होकर जदयू और हम से होते हुए भाजपा तक पहुंचा। राजद की राबड़ी देवी सरकार में जब वो पहली बार मंत्री बने तो भाजपा के दिग्गज नेता सुशील कुमार मोदी ने उनकी उम्र पर सवाल उठाया तो राज्यपाल ने उनको हटा दिया था। बाद में वो राजद के टिकट पर परबत्ता सीट से दो बार विधान सभा चुनाव मे जीते हासिल किये। 2014 में राजद छोड़ने के बाद सम्राट और शकुनी जदयू में शामिल हो गए।
दरअसल, 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में जब नीतीश और लालू ने हाथ मिलाया तो वो जीतनराम मांझी के साथ हम में चले गए। विधानसभा चुनाव में हम की शर्मनाक हार हुई। खुद शकुनी चौधरी तारापुर से हार गए। शकुनी ने हम का प्रदेश अध्यक्ष पद छोड़ा और राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा तक कर दी। कुछ समय राजनीतिक माहौल और संभावना तलाशने के बाद सम्राट चौधरी भाजपा के संग हो गए। रोचक बात यह है कि समय बदला तो वही सुशील कुमार मोदी सम्राट को भाजपा में लेकर आए।
भाजपा में 2017 में शामिल हुए सम्राट चौधरी ने तेजी से अपनी जगह बनाई और रफ्तार के साथ तरक्की की है। भाजपा को सम्राट के तौर पर एक आक्रामक ओबीसी चेहरा मिला, जिसे पार्टी ने कुशवाहा वोट बैंक को साधने के मकसद से आगे बढ़ाया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय के पहल पर सम्राट को प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष का पद मिल गया। बाद में भाजपा ने 2020 में सम्राट को बिहार विधान परिषद का सदस्य बनाया। नीतीश सरकार में सम्राट को पहली बार भाजपा ने पंचायती राज मंत्री बनवाया। उसके बाद सम्राट ने पीछे मुड़कर कभी नहीं देखा।
आज की तारीख में भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के पसंदीदा पिछड़े नेता सम्राट चौधरी को जब 2022 में भाजपा ने विधान परिषद में नेता विपक्ष बनाया तो उनके आक्रामक राजनीतिक तेवर ने नरेंद्र मोदी और अमित शाह को प्रभावित किया। फिर वो प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बना दिए गए। नीतीश 2024 में जब महागठबंधन से लौटे तो सम्राट को पहली बार भाजपा विधायक दल का नेता और डिप्टी सीएम बनाया गया। लगभग दो साल में सम्राट ने राजनीतिक लगन और कौशल से अपने पदनाम के आगे लगा डिप्टी हटाकर बतौर मुख्यमंत्री बिहार की बागडोर थाम ली है।