गांधी मैदान में आज ‘सम्राट शक्ति प्रदर्शन’: 22 दिन बाद कैबिनेट विस्तार, 30 नए चेहरों से बदलेगी बिहार की सियासत

 
    •    पीएम मोदी, अमित शाह और राजनाथ सिंह की मौजूदगी में होगा मेगा शपथ ग्रहण
    •    भाजपा-जदयू समेत NDA में मंत्री पद को लेकर आखिरी दौर की हलचल तेज
    •    मंगल पांडेय और श्रेयसी सिंह का नाम कटने से बढ़ी राजनीतिक चर्चा
Bihar News: बिहार की राजनीति आज एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पद संभालने के महज 22 दिन बाद उनकी सरकार का पहला और सबसे बड़ा कैबिनेट विस्तार होने जा रहा है। राजधानी पटना का ऐतिहासिक गांधी मैदान सत्ता के इस मेगा इवेंट का गवाह बनेगा, जहां 27 से 30 नए मंत्री शपथ लेकर नई सरकार की राजनीतिक ताकत और सामाजिक समीकरण की नई तस्वीर पेश करेंगे।

इस भव्य समारोह को सिर्फ मंत्रिमंडल विस्तार नहीं, बल्कि NDA का बड़ा शक्ति प्रदर्शन माना जा रहा है। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मौजूदगी इसे राष्ट्रीय राजनीति के बड़े आयोजन में बदल रही है।

भाजपा खेमे से विजय कुमार सिन्हा, नीतीश मिश्रा, दिलीप जायसवाल, प्रमोद चंद्रवंशी, लखेंद्र पासवान, संजय टाइगर, रमा निषाद, केदार गुप्ता और मिथलेश तिवारी को मंत्री बनने का संदेश मिलने की चर्चा तेज है। वहीं मंत्री पद की रेस में आगे चल रहे मंगल पांडेय का नाम कटने और पिछली सरकार में मंत्री रहीं श्रेयसी सिंह को जगह नहीं मिलने से सियासी हलकों में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

उधर जदयू कोटे से भगवान सिंह कुशवाहा, बुलो मंडल, श्वेता गुप्ता, शीला मंडल, दामोदर रावत और श्रवण कुमार को मंत्री पद के लिए फोन जाने की खबर है। हालांकि अशोक चौधरी का नाम अब भी वेटिंग लिस्ट में बताया जा रहा है।

कैबिनेट विस्तार से पहले देर रात अमित शाह पटना पहुंचे, जहां उन्होंने जदयू नेता राजीव रंजन सिंह, संजय झा और NDA के अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ लंबी बैठक कर मंत्रिमंडल का अंतिम खाका तैयार किया।

सूत्रों के मुताबिक तय फॉर्मूले के तहत भाजपा से 13, जदयू से 11, एलजेपी (रामविलास) से 2 और HAM व RLM से एक-एक मंत्री शपथ ले सकते हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह विस्तार सिर्फ सरकार गठन नहीं, बल्कि आने वाले चुनावों को ध्यान में रखते हुए जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधने की बड़ी रणनीति का हिस्सा है।

स्पष्ट है कि गांधी मैदान में आज सजने वाला यह सियासी मंच बिहार की राजनीति को नई दिशा देने के साथ-साथ सत्ता के भीतर नए शक्ति संतुलन की पटकथा भी लिख सकता है।