‘मेरे भारत के कंठहार’ के रचनाकार सत्यनारायण का निधन, राजकीय सम्मान से होगी अंत्येष्टि; CM सम्राट चौधरी ने जताया शोक
Bihar news: बिहार की साहित्यिक और सांस्कृतिक दुनिया ने एक महत्वपूर्ण रचनाकार को खो दिया। वरिष्ठ कवि-गीतकार और कवि-शिरोमणि सत्यनारायण का 27 अगस्त की देर रात पटना के कदमकुआं स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। वे 92 वर्ष के थे। उनके निधन की खबर सामने आते ही साहित्य और कला जगत में शोक की लहर दौड़ गई। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने उनके निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए घोषणा की कि उनकी अंत्येष्टि राजकीय सम्मान के साथ की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने बताया अपूरणीय क्षति
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सत्यनारायण के निधन को बिहार के साहित्यिक और सांस्कृतिक क्षेत्र के लिए बड़ी क्षति बताया। उन्होंने कहा कि ‘बिहार-गीत’ के अमर रचनाकार ने अपनी साहित्यिक साधना के जरिए बिहार की मिट्टी, संस्कृति और गौरव को शब्द और स्वर दिए।
मुख्यमंत्री ने शोक संतप्त परिवार, साहित्य प्रेमियों और उनके प्रशंसकों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
‘मेरे भारत के कंठहार’ ने दिलाई अलग पहचान
सत्यनारायण की पहचान केवल एक कवि और गीतकार के तौर पर नहीं थी। उनकी रचनाओं में आम लोगों की भावनाएं, सामाजिक सरोकार और बिहार की सांस्कृतिक चेतना प्रमुखता से दिखाई देती थी।
उनकी चर्चित रचना ‘मेरे भारत के कंठहार’ को बिहार के सांस्कृतिक गीतों में विशेष स्थान मिला। वर्ष 2012 में बिहार के शताब्दी वर्ष के अवसर पर रचे गए इस गीत में प्रदेश की मिट्टी, इतिहास, विरासत और गौरव को भावपूर्ण तरीके से अभिव्यक्त किया गया। इसके अलावा उन्होंने नालंदा खुला विश्वविद्यालय का कुलगीत भी लिखा था।
जेपी आंदोलन में कविता बनी आवाज
सत्यनारायण की साहित्यिक यात्रा गीत, नवगीत और कविता की विभिन्न धाराओं से होकर गुजरी। वर्ष 1974 के जेपी आंदोलन के दौरान उन्होंने नुक्कड़ कविता पाठ के माध्यम से अपनी अलग पहचान बनाई।
उनकी कविताएं उस दौर में सिर्फ साहित्यिक मंचों तक सीमित नहीं रहीं। वे चौक-चौराहों और सड़कों तक पहुंचीं और आम लोगों की आवाज बनीं। सामाजिक बदलाव और जनभावनाओं को अभिव्यक्ति देने वाली उनकी रचनाओं ने उन्हें आंदोलन के दौर में खास पहचान दिलाई।
हिंदी साहित्य के संस्थानों से भी जुड़े रहे
सत्यनारायण बिहार हिंदी प्रगति समिति के अध्यक्ष और बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन के उपाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण दायित्वों से भी जुड़े रहे। कवि-कथाकार हेमंत कुमार ने उनके निधन पर दुख व्यक्त करते हुए उन्हें संवेदना के स्वर का अनुपम गायक बताया। उन्होंने कहा कि सत्यनारायण के जाने से हिंदी साहित्य और काव्य-जगत को गहरा आघात पहुंचा है।
नागार्जुन और भारतेन्दु सम्मान से सम्मानित
साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान को कई प्रतिष्ठित सम्मानों से भी नवाजा गया। बिहार सरकार ने उन्हें नागार्जुन सम्मान (2020-21) प्रदान किया था। वहीं भारत सरकार की ओर से वर्ष 2023 में उन्हें भारतेन्दु हरिश्चन्द्र पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
सत्यनारायण का निधन बिहार की साहित्यिक विरासत के लिए एक ऐसी कमी छोड़ गया है, जिसे भर पाना आसान नहीं होगा। जेपी आंदोलन के दौरान नुक्कड़ पर गूंजती उनकी कविताओं से लेकर ‘मेरे भारत के कंठहार’ जैसे गीतों तक, उनका रचनात्मक योगदान लंबे समय तक बिहार की सांस्कृतिक स्मृति में जीवित रहेगा।