पटना में ‘सेव एजुकेशन कॉन्क्लेव’, सार्वजनिक शिक्षा की चुनौतियों पर शिक्षाविदों ने जताई चिंता
Patna: बिहार की राजधानी पटना में आयोजित ‘सेव एजुकेशन कॉन्क्लेव’ में देशभर से जुटे शिक्षाविदों, शिक्षकों और नागरिक समाज से जुड़े लोगों ने सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। गांधी संग्रहालय में हुए इस सम्मेलन में शिक्षा के लिए पर्याप्त बजट, शिक्षकों की उपलब्धता, शोध सुविधाओं और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक माहौल देने जैसे विषय प्रमुख रहे।
बिहार प्रोग्रेसिव यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (BPUTA) और जन संस्कृति मंच (JSM), पटना के संयुक्त आयोजन में दिनभर अलग-अलग सत्रों के जरिए सार्वजनिक शिक्षा के सामने मौजूद चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया गया।
शिक्षा व्यवस्था में संसाधनों की कमी का मुद्दा उठा
कार्यक्रम की शुरुआत जन संस्कृति मंच से जुड़े प्रमोद यादव, राजन कुमार और पुनीत पाठक के जनगीतों से हुई। इसके बाद डॉ. हेमंत कुमार झा ने प्रतिनिधियों का स्वागत किया, जबकि डॉ. चिंटू कुमारी ने कार्यक्रम की विषय-वस्तु पर जानकारी दी।
पटना साइंस कॉलेज के डॉ. शोभन चक्रवर्ती ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए सस्ती सार्वजनिक शिक्षा, विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक स्वायत्तता और विद्यार्थियों के अधिकारों की सुरक्षा जरूरी है।
सम्मेलन में विश्वविद्यालयों और सरकारी शिक्षण संस्थानों में संसाधनों की कमी, शिक्षकों की नियुक्ति में देरी और शोध के लिए सीमित सुविधाओं को लेकर भी चिंता जताई गई।
विश्वविद्यालयों की भूमिका और स्वायत्तता पर चर्चा
जेएनयू के डॉ. अविनाश कुमार ने विश्वविद्यालयों में शिक्षा और शोध के स्वरूप में आ रहे बदलावों को लेकर अपनी बात रखी। जादवपुर विश्वविद्यालय के डॉ. अरिंदम कुमार शील और डॉ. देबब्रत बेरा ने भी विश्वविद्यालय परिसरों में लोकतांत्रिक संवाद और शांतिपूर्ण विरोध की भूमिका पर विचार साझा किए।
सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे एनआईटी पटना के सेवानिवृत्त प्रोफेसर और जन संस्कृति मंच पटना के अध्यक्ष संतोष कुमार ने सार्वजनिक शिक्षण संस्थानों में पर्याप्त संसाधन, शोध सुविधाएं और शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ाने की जरूरत बताई।
पटना विश्वविद्यालय के प्रो. तरुण कुमार ने विश्वविद्यालयों की लोकतांत्रिक चेतना और सामाजिक संवाद में भूमिका पर बात रखी। वहीं प्रो. तौकीर आलम ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020, शिक्षक नियुक्तियों में देरी और शिक्षा के लिए वित्तीय संसाधनों से जुड़े मुद्दे उठाए।
बिहार के सरकारी स्कूलों की स्थिति पर भी सवाल
माले विधायक और BPUTA के संरक्षक डॉ. संदीप सौरव ने बिहार की शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को सामने रखा। उन्होंने खास तौर पर ग्रामीण इलाकों के सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं, शिक्षकों की कमी, सुरक्षित पेयजल और डिजिटल संसाधनों की उपलब्धता को लेकर सवाल उठाए।
AIFUCTO के महासचिव प्रो. अरुण कुमार ने उच्च शिक्षा में संस्थागत स्वायत्तता और असहमति के अधिकार से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी।
सामाजिक न्याय और शिक्षा तक समान पहुंच पर जोर
ए.एन. सिन्हा सामाजिक अध्ययन संस्थान, पीपल्स यूनिटी फॉर सिविल लिबर्टीज और CPDRS की ओर से अधिवक्ता डॉ. गोपाल कृष्ण ने सामाजिक न्याय, संस्थागत सहयोग और सामूहिक संवाद की जरूरत पर विचार रखे।
कार्यक्रम में पटना विश्वविद्यालय कर्मचारी संघ के सुबोध कुमार और JNUSU के पूर्व अध्यक्ष धनंजय कुमार ने भी संबोधित किया। सम्मेलन के दौरान चर्चा सत्र में शिक्षकों और विद्यार्थियों ने विभिन्न मुद्दों पर सवाल रखे और वक्ताओं के साथ संवाद किया।
सार्वजनिक शिक्षा को मजबूत करने का आह्वान
दिनभर चले सम्मेलन के अंत में सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और समाज के सभी वर्गों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की समान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए सामूहिक प्रयास जारी रखने का आह्वान किया गया। कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन अनिल अंशुमन ने किया।