बिहार में घर-घर होगी गंभीर बीमारियों की जांच, 2 सितंबर से शुरू होगा ‘जांच एवं उपचार चिकित्सा आपके द्वार’ अभियान

 

Bihar News: गैर-संचारी बीमारियों की समय रहते पहचान और इलाज को लेकर बिहार स्वास्थ्य विभाग अब लोगों के घर तक पहुंचने की तैयारी में है। प्रदेश में ‘जांच एवं उपचार चिकित्सा आपके द्वार’ नाम से विशेष अभियान शुरू किया जा रहा है। अभियान की शुरुआत 2 सितंबर 2026 को सुबह 10 बजे पटना के ऊर्जा ऑडिटोरियम में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम से होगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी अभियान का शुभारंभ करेंगे। कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री निशांत भी मौजूद रहेंगे।

अभियान का फोकस उन बीमारियों की शुरुआती पहचान पर है, जिनका समय पर पता चलने और नियमित उपचार से गंभीर स्थिति तथा असामयिक मौत के जोखिम को कम किया जा सकता है। इसके तहत 30 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों की विशेष रूप से स्क्रीनिंग की जाएगी।

डायबिटीज से लेकर कैंसर तक की होगी जांच

अभियान के दौरान मधुमेह और उच्च रक्तचाप के अलावा मुंह, स्तन और गर्भाशय के मुख के कैंसर की स्क्रीनिंग की जाएगी। इसके साथ ही हृदय रोग, नॉन-अल्कोहलिक फैटी लीवर डिजीज और क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) जैसी बीमारियों की पहचान और प्रबंधन पर भी जोर रहेगा।

स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य केवल बीमारी की पहचान तक सीमित नहीं है। जांच में जोखिम या बीमारी की पुष्टि होने पर मरीजों को आवश्यक उपचार, दवा और आगे की जांच के लिए स्वास्थ्य संस्थानों से जोड़ा जाएगा।

घर-घर पहुंचेगी स्वास्थ्य टीम

अभियान की सबसे खास बात यह होगी कि स्वास्थ्यकर्मी लोगों तक पहुंचकर शुरुआती स्तर पर ही जोखिम वाले मरीजों की पहचान करेंगे। आशा और आशा फैसिलिटेटर, एएनएम के साथ घर-घर जाकर सर्वेक्षण करेंगी। इस दौरान फैमिली फोल्डर और CBAC फॉर्म के माध्यम से लोगों की स्वास्थ्य स्थिति और जोखिम कारकों की जानकारी जुटाई जाएगी।

जिन लोगों में बीमारी या जोखिम के संकेत मिलेंगे, उनकी लाइन-लिस्ट तैयार की जाएगी। ऐसे मरीजों को दवा लेने, आगे की जांच कराने और नियमित फॉलो-अप के लिए प्रेरित किया जाएगा।

आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में भी स्क्रीनिंग

अभियान के तहत आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर भी 30 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की स्क्रीनिंग होगी। CHO और ANM लोगों की ऊंचाई, वजन और BMI की जांच के साथ स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों का आकलन करेंगे।

गंभीर स्थिति वाले मरीजों को जरूरत के अनुसार उच्च स्वास्थ्य केंद्रों पर रेफर किया जाएगा। टेली-कंसल्टेशन की सुविधा के जरिए विशेषज्ञ चिकित्सकीय सलाह और आवश्यक दवा उपलब्ध कराने की भी व्यवस्था रहेगी।

जांच और इलाज की सुविधाएं होंगी मुफ्त

जरूरत पड़ने पर मरीजों को नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में विभिन्न महत्वपूर्ण निःशुल्क लैब और डायग्नोस्टिक जांच की सुविधा मिलेगी। चिकित्सा पदाधिकारी OPD स्तर पर स्क्रीनिंग, आवश्यक जांच और उपचार की व्यवस्था देखेंगे। जटिल मामलों के प्रबंधन के साथ मरीजों को उचित स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाना भी अभियान का हिस्सा होगा।

हर स्तर पर होगी निगरानी

अभियान की निगरानी के लिए प्रखंड से लेकर जिला स्तर तक समीक्षा तंत्र बनाया गया है। प्रखंड स्तर पर BCM नोडल अधिकारी की भूमिका निभाएंगे, जबकि BHM और प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी रोजाना अभियान की प्रगति की समीक्षा करेंगे।

जिला स्तर पर NCDO को नोडल अधिकारी बनाया गया है। सिविल सर्जन-सह-सदस्य सचिव, DPM और DM&EO वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अभियान की प्रगति, मानव संसाधन और दवाओं की उपलब्धता पर नजर रखेंगे।

NCD पोर्टल पर दर्ज होगा हर आंकड़ा

राज्य स्वास्थ्य समिति ने अभियान से जुड़े आंकड़ों को NCD पोर्टल पर रियल-टाइम अपडेट करने के निर्देश दिए हैं। इससे कितने लोगों की स्क्रीनिंग हुई, कितने मरीज जोखिम में पाए गए और कितने लोगों को उपचार या रेफरल की जरूरत पड़ी, इसकी निगरानी लगातार की जा सकेगी।

स्वास्थ्य विभाग की कोशिश है कि अभियान के जरिए गैर-संचारी रोगों को शुरुआती चरण में ही पकड़कर लोगों को समय पर इलाज उपलब्ध कराया जाए। ‘जांच एवं उपचार चिकित्सा आपके द्वार’ अभियान के जरिए अब बीमारी का इंतजार करने के बजाय स्वास्थ्य सेवाओं को लोगों के दरवाजे तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।