जन्मदिन से पहले जदयू को छात्र राजनीति में झटका: पटना यूनिवर्सिटी में NSUI की धमाकेदार वापसी

 
Bihar news: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के जन्मदिन से ठीक पहले उनकी पार्टी जनता दल (यू) को छात्र राजनीति में बड़ा झटका लगा है। बिहार की सियासत में अहम माने जाने वाले पटना यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव में जदयू का छात्र संगठन एक भी पद जीतने में असफल रहा। वहीं एनडीए की सहयोगी भाजपा को भी अपेक्षित सफलता नहीं मिली।

NSUI की जोरदार जीत

इस बार मुकाबले में कांग्रेस से जुड़ा छात्र संगठन National Students’ Union of India (NSUI) छाया रहा। अध्यक्ष पद पर शांतनु शेखर ने 1496 मतों के भारी अंतर से छात्र जदयू के प्रिंस कुमार को हराया। शांतनु को 2896 वोट मिले, जबकि प्रिंस 1400 वोटों पर सिमट गए।

महासचिव पद पर खुशी कुमारी ने जीत दर्ज की। उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय प्रत्याशी सिफत फैज ने छात्र जदयू के आयुष हर्ष को 65 मतों से पराजित किया। संयुक्त सचिव पद पर एबीवीपी के अभिषेक कुमार को सफलता मिली।

जदयू लगातार दूसरी बार खाली हाथ

इन नतीजों ने साफ कर दिया कि जदयू का छात्र संगठन लगातार दूसरी बार पूरी तरह खाली हाथ रहा। इससे पहले 2025 के चुनाव में एबीवीपी की मैथिली मृणालिनी ने अध्यक्ष पद जीतकर इतिहास रचा था।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि छात्र राजनीति के ये संकेत भविष्य की मुख्यधारा की राजनीति पर भी असर डाल सकते हैं। खासकर तब, जब मुख्यमंत्री के जन्मदिन से पहले आए इन परिणामों ने पार्टी की रणनीति और संगठनात्मक पकड़ पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

40 साल बाद कांग्रेस की वापसी

करीब चार दशक बाद पटना यूनिवर्सिटी छात्रसंघ में कांग्रेस समर्थित संगठन की ऐसी मजबूत वापसी को विपक्ष बड़ी उपलब्धि मान रहा है। अध्यक्ष और महासचिव दोनों अहम पदों पर कब्जा जमाना कांग्रेस खेमे के लिए उत्साह का कारण बना हुआ है।

छात्र राजनीति के इस बदले समीकरण ने बिहार की सियासत में नई बहस छेड़ दी है-क्या यह बदलाव आने वाले बड़े चुनावों की आहट है, या सिर्फ कैंपस तक सीमित एक संदेश? फिलहाल, नतीजों ने सत्ता पक्ष की खुशी पर जरूर हल्की परछाईं डाल दी है।