30 सितंबर से पहले निपटाएं Tax Audit! गया में सेमिनार में मिली अहम जानकारी

Gaya: टैक्स ऑडिट को लेकर गया में सेमिनार आयोजित किया गया, जिसमें CA को आयकर कानून में बदलाव, टर्नओवर और ऑनलाइन ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करने की जानकारी दी गई. विशेषज्ञों ने कारोबारियों से 30 सितंबर से पहले ऑडिट प्रक्रिया पूरी कराने की अपील की. सेमिनार में बताया गया कि देरी होने पर ₹75,000 से ₹1.50 लाख तक फीस का प्रावधान है.
 

Gaya: गया शहर के काशीनाथ मोड़ स्थित एक निजी होटल में टैक्स ऑडिट को लेकर महत्वपूर्ण सेमिनार का आयोजन किया गया। इसमें जिले के चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को टैक्स ऑडिट की प्रक्रिया, आयकर कानून में हुए बदलाव, टर्नओवर से जुड़े प्रावधान और ऑडिट रिपोर्ट ऑनलाइन दाखिल करने की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। कार्यक्रम में पूर्व रीजनल काउंसिल सदस्य मनीषा बियानी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं।

30 सितंबर तक टैक्स ऑडिट पूरा करने पर जोर

सेमिनार को संबोधित करते हुए मनीषा बियानी ने कहा कि टैक्स ऑडिट से जुड़े कारोबारियों और पेशेवरों के लिए निर्धारित समय-सीमा का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। उन्होंने बताया कि निर्धारित मामलों में 30 सितंबर तक टैक्स ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करनी होती है।

उन्होंने कहा कि कंपनी, पार्टनरशिप फर्म, प्रोपराइटरशिप फर्म समेत आयकर कानून के तहत निर्धारित श्रेणी के ऐसे व्यवसाय, जिनका टर्नओवर तय सीमा से अधिक है, उनके लिए टैक्स ऑडिट आवश्यक हो सकता है। ऑडिट के दौरान टर्नओवर का सही मिलान, रिकॉर्ड अपडेट करने और सभी जरूरी दस्तावेजों की जांच के बाद रिपोर्ट को अंतिम रूप देने पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

मनीषा बियानी ने कहा कि सेमिनार का उद्देश्य CA को टैक्स ऑडिट से जुड़े बदलावों की सही जानकारी देना है, ताकि वे अपने क्लाइंट की रिपोर्ट को लागू प्रावधानों के अनुरूप तैयार कर सकें।

आयकर कानून में बदलाव की दी जानकारी

सीए सह वक्ता साक्षी सिंह ने आयकर कानून में हुए बदलावों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 से संबंधित टैक्स ऑडिट की प्रक्रिया मौजूदा लागू प्रावधानों के अनुसार होगी, जबकि आने वाले वर्षों में नए आयकर प्रावधानों के अनुरूप बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

उन्होंने चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को सलाह दी कि वे अभी से अपनी कार्यप्रणाली, दस्तावेज और रिकॉर्ड को नए नियमों के अनुरूप व्यवस्थित करें। टैक्स ऑडिट और आईटीआर दाखिल करने के दौरान काम का दबाव अधिक रहता है। ऐसे में पुराने दस्तावेज, पुराने प्रारूप या गलत जानकारी अपलोड होने की संभावना रहती है। इसलिए रिपोर्ट अपलोड करने से पहले सभी आंकड़ों और दस्तावेजों की दोबारा जांच जरूरी है।

ITR अपलोड करने की प्रक्रिया भी समझाई

साक्षी सिंह ने टैक्स ऑडिट के साथ-साथ आईटीआर अपलोड करने और ऑडिट रिपोर्ट ऑनलाइन दाखिल करने की प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि टैक्स से जुड़े कार्यों में छोटी सी गलती भी बाद में परेशानी का कारण बन सकती है।

उन्होंने कहा कि सभी जरूरी दस्तावेज पहले से तैयार रखने और सही जानकारी के आधार पर रिपोर्ट तैयार करने से गलतियों की संभावना कम की जा सकती है।

30 सितंबर की समय-सीमा को लेकर व्यापारियों को किया जागरूक

गया जी के सीए सह कन्वेनर दीपक कुमार ने टैक्स ऑडिट की समय-सीमा और देरी से जुड़े प्रावधानों को लेकर व्यापारियों को जागरूक रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि निर्धारित समय-सीमा के बाद ऑडिट से संबंधित अतिरिक्त शुल्क का प्रावधान है।

उन्होंने कारोबारियों से अपील की कि वे आखिरी समय का इंतजार न करें और 30 सितंबर से पहले अपने चार्टर्ड अकाउंटेंट के माध्यम से ऑडिट की प्रक्रिया पूरी करा लें। साथ ही वित्तीय दस्तावेज, बही-खाते और अन्य जरूरी रिकॉर्ड समय पर तैयार कर CA को उपलब्ध कराने को कहा।

देरी होने पर फीस का प्रावधान

सेमिनार में दी गई जानकारी के अनुसार, इस टैक्स ईयर में नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। कारोबारियों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपने आवश्यक अपडेट और ऑडिट की प्रक्रिया पूरी कराने पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी गई।

बताया गया कि 30 सितंबर के बाद अपडेट कराने में देरी होने पर फीस का प्रावधान है। एक महीने तक देरी होने पर ₹75,000 की फीस और इसके बाद अपडेट कराने पर ₹1.50 लाख तक फीस लग सकती है।

कार्यक्रम में बताया गया कि निर्धारित फीस जमा किए बिना ऑडिट की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकेगी और ऑडिट रिपोर्ट अपलोड करने में भी परेशानी हो सकती है। ऐसे में व्यापारियों और पेशेवरों को समय-सीमा और बदलते आयकर नियमों को लेकर अपडेट रहने की सलाह दी गई।