बिहार विधानसभा में लंबित मामलों पर स्पीकर सख्त, इस वित्तीय वर्ष में निपटाने का निर्देश; चिकित्सा प्रतिपूर्ति होगी कैशलेस
Bihar News: बिहार विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने विधानसभा से जुड़े लंबित मामलों और सदस्यों-कर्मचारियों की सुविधाओं को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। मंगलवार को उन्होंने मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत के साथ बैठक कर कई अहम मुद्दों पर चर्चा की। बैठक में लंबित समिति मामलों के शीघ्र निष्पादन से लेकर चिकित्सा प्रतिपूर्ति की प्रक्रिया को कैशलेस बनाने तक के निर्देश दिए गए।
चिकित्सा प्रतिपूर्ति की प्रक्रिया होगी आसान
अध्यक्ष ने सदस्यों, विधानसभा सचिवालय के पदाधिकारियों और कर्मचारियों को चिकित्सा प्रतिपूर्ति लेने में आ रही परेशानियों का संज्ञान लिया। उन्होंने इस प्रक्रिया को जल्द से जल्द कैशलेस करने का निर्देश दिया, ताकि इलाज के बाद भुगतान से जुड़ी प्रक्रियाओं में अनावश्यक परेशानी न हो।
इसके साथ ही विधानसभा अध्यक्ष ने सदस्यों के बैठने की सुविधा को लेकर भी सुझाव दिया। उन्होंने प्रत्येक प्रखंड में उनके लिए स्थान या भूखंड चिह्नित कर भवन निर्माण कराने अथवा उपलब्ध पंचायत भवन में ही आवश्यक व्यवस्था करने की बात कही।
2499 समिति कंडिकाएं अब भी लंबित
बैठक में सरकारी कामकाज से जुड़े लंबित मामलों को लेकर अध्यक्ष ने चिंता जताई। उन्होंने बताया कि भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट के आधार पर वर्ष 2008-09 से अब तक लोक लेखा समिति और लोक उपक्रम समिति की करीब 2499 कंडिकाएं, उप-कंडिकाओं सहित, लंबित हैं।
अध्यक्ष ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि संबंधित समितियों और विभागों के पदाधिकारी आपसी समन्वय बनाकर इन लंबित मामलों के निष्पादन की प्रक्रिया तेज करें और इसी वित्तीय वर्ष में अधिक से अधिक मामलों का निपटारा सुनिश्चित किया जाए।
30 साल पुराने आश्वासन भी लंबित
विधानसभा अध्यक्ष ने विभागों से जुड़े आश्वासन लंबित रहने के मुद्दे पर भी गंभीरता दिखाई। बैठक में बताया गया कि वर्ष 1995 से 2025 तक विभिन्न विभागों के करीब 23,517 आश्वासन अब भी लंबित हैं।
इन मामलों के निपटारे के लिए विभागीय स्तर पर प्रभावी समन्वय और नियमित समीक्षा की जरूरत पर जोर दिया गया।
समितियों की बैठकों में अधिकारियों की गैरमौजूदगी पर सख्ती
संसदीय समितियों की विभागीय बैठकों में अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव या सचिव स्तर के अधिकारियों की अनुपस्थिति को लेकर भी अध्यक्ष ने नाराजगी जताई। उन्होंने मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि विशेष परिस्थितियों को छोड़कर इन अधिकारियों की अनुपस्थिति में विशेष सचिव से ऊपर के स्तर के किसी सक्षम अधिकारी को बैठक में शामिल होने के लिए विधिवत अधिकृत किया जाए।
मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने अध्यक्ष को भरोसा दिलाया कि सभी विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव और सचिव के साथ बैठक कर विधानसभा अध्यक्ष के निर्देशों के अनुपालन को सुनिश्चित कराया जाएगा।
बैठक में बिहार विधानसभा की प्रभारी सचिव सहित सचिवालय के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी भी मौजूद रहे। अब देखना होगा कि विधानसभा अध्यक्ष के निर्देशों के बाद वर्षों से लंबित समिति मामलों और विभागीय आश्वासनों के निपटारे की प्रक्रिया कितनी तेजी से आगे बढ़ती है।