बिहार पंचायत चुनाव 2026 पर बढ़ी हलचल, मौजूदा सीमाओं पर ही चुनाव कराने की मांग; परिसीमन को लेकर उठे सवाल
Patna: बिहार में प्रस्तावित त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। चुनाव की समयसीमा और पंचायतों के परिसीमन को लेकर अब आवाज उठने लगी है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव संघर्ष समिति ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग से संवैधानिक प्रावधानों के तहत तय समय पर चुनाव कराने की मांग की है।
समिति के अध्यक्ष जगन्नाथ चौपाल की अध्यक्षता में आईएमए हॉल में हुई बैठक में पंचायत चुनाव की तैयारी, परिसीमन और नई पंचायतों के गठन से जुड़ी संभावित चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई।
समिति बोली- पांच साल का कार्यकाल, समय पर चुनाव जरूरी
बैठक में समिति ने संविधान के अनुच्छेद 243 का हवाला देते हुए कहा कि पंचायती राज संस्थाओं का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है। ऐसे में चुनाव प्रक्रिया को निर्धारित संवैधानिक समयसीमा के भीतर पूरा किया जाना चाहिए।
समिति का तर्क है कि पंचायतों का कार्यकाल पूरा होने के बाद चुनाव में अनावश्यक देरी संवैधानिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं होगी। इसलिए सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को समय रहते चुनाव कार्यक्रम को लेकर स्पष्टता देनी चाहिए।
2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन पर सवाल
बैठक में पंचायतों के परिसीमन को लेकर भी महत्वपूर्ण सवाल उठाया गया। समिति के मुताबिक मौजूदा परिसीमन प्रक्रिया 2011 की जनगणना के आंकड़ों पर आधारित है, जबकि नई जनगणना की प्रक्रिया चल रही है।
समिति ने सरकार के गजट में 31 मार्च 2027 तक परिसीमन नहीं किए जाने से जुड़े प्रावधान का हवाला देते हुए मांग की कि फिलहाल परिसीमन की प्रक्रिया को रोककर नई जनगणना के आंकड़ों का इंतजार किया जाए। इसके बाद नए आंकड़ों के आधार पर पंचायतों की सीमाओं का वैज्ञानिक तरीके से निर्धारण किया जाए।
पहले चुनाव, फिर नई जनगणना के आधार पर परिसीमन की मांग
समिति ने सरकार के सामने एक स्पष्ट विकल्प भी रखा है। उसका कहना है कि 2026 का पंचायत चुनाव मौजूदा पंचायत सीमाओं के आधार पर कराया जाए। इसके बाद जब 2026-27 की जनगणना के आंकड़े उपलब्ध हो जाएं तो पंचायतों का नए सिरे से परिसीमन किया जाए।
समिति का मानना है कि इससे चुनाव समय पर हो सकेगा और बाद में नई जनसंख्या के आंकड़ों के आधार पर पंचायतों की सीमाओं को ज्यादा वैज्ञानिक तरीके से तय किया जा सकेगा।
नई पंचायतें बनीं तो बढ़ेगा सरकार पर खर्च
बैठक में नई पंचायतों के गठन से पड़ने वाले अतिरिक्त वित्तीय और प्रशासनिक बोझ को लेकर भी चिंता जताई गई। समिति के मुताबिक नई पंचायतें बनने के बाद सिर्फ सीमा निर्धारण ही नहीं होगा, बल्कि उनके लिए बुनियादी ढांचा और कर्मचारी भी उपलब्ध कराने होंगे।
इसमें पंचायत भवन, स्कूल, पंचायत सचिव, अन्य कर्मचारी, कार्यपालक सहायक, जूनियर इंजीनियर और सफाईकर्मियों समेत कई स्तरों पर अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत पड़ सकती है।
समिति ने कहा कि नई पंचायतों के गठन से पहले सरकार को बजट, जमीन, भवन और मानव संसाधन की जरूरत का आकलन कर स्पष्ट रोडमैप तैयार करना चाहिए।
अब सरकार और आयोग के रुख पर नजर
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव संघर्ष समिति ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग से चुनाव प्रक्रिया को संवैधानिक समयसीमा में पूरा करने और परिसीमन को लेकर स्पष्ट नीति बनाने की मांग की है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बिहार में 2026 का पंचायत चुनाव मौजूदा पंचायत सीमाओं पर ही कराया जाएगा या उससे पहले परिसीमन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी? समिति की मांग के बाद इस मुद्दे पर सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग के अगले कदम पर सबकी नजर रहेगी।