सहकारी बैंकों की लापरवाही पर सख्ती, प्रबंध निदेशकों की तय होगी जवाबदेही; मंत्री राम कृपाल यादव ने दिए कड़े निर्देश
Bihar News: बिहार में सहकारी बैंकों के कामकाज और वित्तीय अनुशासन को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। सहकारिता मंत्री राम कृपाल यादव ने स्पष्ट किया है कि NPA कम करने, माइक्रो एटीएम को सक्रिय करने, RBI और NABARD के मानकों का पालन करने तथा ऋण वितरण में पारदर्शिता बरतने में लापरवाही मिलने पर संबंधित सहकारी बैंकों के प्रबंध निदेशकों की जवाबदेही तय की जाएगी।
मंत्री ने बुधवार को भागलपुर और तिरहुत प्रमंडल के अधिकारियों के साथ विभागीय योजनाओं और कार्यक्रमों की समीक्षा की। बैठक में धान खरीद, फसल सहायता योजना, PACS, KCC ऋण, सहकारी गोदाम, बैंक मित्र योजना, जन औषधि केंद्र, जन वितरण प्रणाली और सहकारी बैंकों से जुड़े मामलों की विस्तार से समीक्षा की गई।
NPA और बैंकिंग सेवाओं पर खास नजर
सहकारी बैंकों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा के दौरान मंत्री ने NPA में कमी लाने को प्राथमिकता देने को कहा। उन्होंने निर्देश दिया कि जिन बैंकों में NPA कम करने की दिशा में अपेक्षित प्रगति नहीं हो रही है, वहां जिम्मेदारी तय की जाए।
इसके साथ ही माइक्रो एटीएम की उपलब्धता और उसके इस्तेमाल की भी समीक्षा की गई। मंत्री ने शेष स्वीकृत माइक्रो एटीएम को निर्धारित समय में उपलब्ध कराने और उन्हें सक्रिय करने का निर्देश दिया।
हर बैंक मित्र को 100 खाते खोलने का लक्ष्य
ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं का दायरा बढ़ाने के लिए बैंक मित्र योजना को प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया। मंत्री ने कहा कि बैंक मित्रों के माध्यम से गांवों तक बैंकिंग सुविधाएं पहुंचनी चाहिए।
बैठक में प्रत्येक DMA/Bank Mitra के माध्यम से हर महीने कम से कम 100 नए खाते खोलने का लक्ष्य तय करने का निर्देश दिया गया। इसके लिए कैंप लगाकर लोगों को सहकारी बैंकों से जोड़ने और माइक्रो एटीएम के जरिए लेन-देन बढ़ाने की बात कही गई।
धान खरीद में गड़बड़ी मिली तो कार्रवाई
धान अधिप्राप्ति की व्यवस्था को लेकर भी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए। मंत्री ने कहा कि पैक्स के स्तर पर धान खरीद में किसी तरह की गड़बड़ी सामने आने पर सिर्फ संबंधित संस्था ही नहीं, बल्कि क्षेत्रीय पदाधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जाएगी।
यदि किसी अधिकारी की संलिप्तता सामने आती है तो नियमानुसार अनुशासनिक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया। सरकार का जोर धान खरीद की प्रक्रिया में पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन बनाए रखने पर है।
भागलपुर में 99.8 फीसदी धान की खरीद
समीक्षा के दौरान धान अधिप्राप्ति के आंकड़े भी सामने रखे गए। खरीफ विपणन मौसम 2025-26 में भागलपुर प्रमंडल के भागलपुर और बांका जिलों में 1,55,881 मीट्रिक टन के लक्ष्य के मुकाबले 1,55,723.80 मीट्रिक टन, यानी 99.8 प्रतिशत धान की खरीद हुई।
इससे संबंधित 1,06,277.10 मीट्रिक टन समतुल्य चावल में से 1,05,619.70 मीट्रिक टन चावल राज्य खाद्य निगम को उपलब्ध कराया जा चुका है।
तिरहुत में भी 99 प्रतिशत से ज्यादा खरीद
तिरहुत प्रमंडल में धान अधिप्राप्ति का लक्ष्य 4,77,346 मीट्रिक टन निर्धारित था। इसके मुकाबले 4,75,647.37 मीट्रिक टन यानी 99.64 प्रतिशत धान की खरीद की गई।
इसके समतुल्य 3,22,815.50 मीट्रिक टन चावल में से 3,13,502.14 मीट्रिक टन राज्य खाद्य निगम को उपलब्ध कराया जा चुका है। बैठक में बचे हुए CMR की आपूर्ति जल्द पूरी करने का निर्देश दिया गया।
गोदाम निर्माण में तेजी लाने को कहा
सहकारी गोदामों और दूसरी आधारभूत संरचना परियोजनाओं की भी समीक्षा हुई। मंत्री ने निर्माणाधीन और लंबित योजनाओं में तेजी लाकर उन्हें निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने को कहा।
भागलपुर प्रमंडल में वर्ष 2024-25 में स्वीकृत 25 गोदामों में से 15 का निर्माण पूरा हो चुका है। वहीं तिरहुत प्रमंडल में वर्ष 2023-24 में स्वीकृत 56 गोदामों में 41 गोदामों का निर्माण पूरा होने की जानकारी दी गई।
CSC और डिजिटल सेवाओं पर भी जोर
सहकारी समितियों में चल रहे कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) की स्थिति की भी समीक्षा की गई। मंत्री ने इन केंद्रों के संचालन में तेजी लाने और स्थानीय लोगों को उपलब्ध सेवाओं की जानकारी देने का निर्देश दिया।
उन्होंने कहा कि जागरूकता बढ़ने से CSC के जरिए लेन-देन में भी वृद्धि होगी और ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सहकारी सेवाओं का इस्तेमाल बढ़ाया जा सकेगा।
RBI-NABARD के नियमों का पालन जरूरी
सहकारी बैंकों को भारतीय रिजर्व बैंक और NABARD के निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। मोतिहारी, मुजफ्फरपुर और भागलपुर जिला सहकारी बैंकों के लंबित मामलों को समयबद्ध तरीके से निपटाने पर विशेष जोर दिया गया।
बैठक में वित्तीय अनुशासन, नियामकीय अनुपालन और पारदर्शी ऋण वितरण को लेकर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
PACS से जन औषधि केंद्र तक की समीक्षा
बैठक में PACS के डिजिटलीकरण, KCC ऋण, ‘सहकारिता में सहकार’, जन औषधि केंद्र, जन वितरण प्रणाली, वेजफेड, उपभोक्ता समितियों और प्राथमिक सब्जी उत्पादक सहकारी समितियों से जुड़ी गतिविधियों की भी समीक्षा हुई।
सहकारी संस्थाओं के अंकेक्षण और वित्तीय अनुशासन पर भी ध्यान देने को कहा गया। बैठक में सहकारिता विभाग के सचिव धर्मेन्द्र सिंह, अपर सचिव अभय कुमार सिंह सहित भागलपुर, तिरहुत प्रमंडल और मुख्यालय के संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।