21 दिन के अनशन के बाद छात्रों को मिली बड़ी राहत, राज्यपाल से वार्ता के बाद बनी सहमति
Bihar news: सहायक प्राध्यापक भर्ती नियमों में बदलाव समेत विभिन्न मांगों को लेकर गर्दनीबाग में पिछले 21 दिनों से चल रहा छात्रों का अनशन अब समाप्त होने की राह पर है। ऑल पीएच.डी. होल्डर्स एंड रिसर्च एसोसिएशन के छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की राज्यपाल से करीब दो घंटे चली वार्ता के बाद कई अहम बिंदुओं पर सहमति बनी है। छात्रों ने अनशन वापस लेने का आश्वासन दिया है।
सहायक प्राध्यापक भर्ती पर फिलहाल रोक
वार्ता में सबसे महत्वपूर्ण सहमति सहायक प्राध्यापक भर्ती पर बनी। तय किया गया कि सहायक प्राध्यापक भर्ती परिनियम, 2026 में आवश्यक संशोधन होने तक इसी नियम के आधार पर नियमित या संविदा नियुक्ति नहीं की जाएगी। फिलहाल इस परिनियम को स्थगित रखने की बात कही गई है।
छात्रों की मांगों और भर्ती नियमों की समीक्षा के लिए 15 दिनों के भीतर एक समिति गठित करने पर भी सहमति बनी है। राज्यपाल मुख्यमंत्री से विचार-विमर्श के बाद इस समिति का गठन करेंगे। समिति में प्रमुख शिक्षाविदों के साथ शिक्षा क्षेत्र का अनुभव रखने वाले प्रशासकों को भी शामिल किया जाएगा।
55 साल तक उम्र सीमा रखने की मांग पर होगा विचार
छात्रों की प्रमुख मांगों में सहायक प्राध्यापक भर्ती के लिए अधिकतम आयु सीमा 55 वर्ष करने का मुद्दा भी शामिल है। समिति इस मांग पर विचार करेगी। इसके साथ ही छात्रों ने भर्ती प्रक्रिया में लिखित परीक्षा कराने का सुझाव दिया है। यह परीक्षा वस्तुनिष्ठ प्रकार की रखने और उसमें सफल अभ्यर्थियों के API स्कोर को जोड़कर मेरिट तैयार करने की मांग रखी गई है।
प्रस्ताव के अनुसार लिखित परीक्षा के अंक और API को मिलाकर समेकित मेरिट सूची तैयार की जा सकती है। इसके आधार पर निर्धारित संख्या में अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा। इंटरव्यू में टीचिंग डेमो शामिल करने की मांग भी रखी गई है।
API स्कोर में PhD को ज्यादा महत्व देने की मांग
छात्रों ने API की गणना को लेकर भी कई सुझाव दिए हैं। उनकी मांग है कि मैट्रिक और इंटर के अंकों को API में शामिल नहीं किया जाए। NET और JRF के लिए अधिकतम 11 अंक तक का अधिमान देने की बात कही गई है, जबकि PhD के लिए 30 से कम अंक नहीं रखने की मांग है।
शोध प्रकाशन और शिक्षण अनुभव को भी API में शामिल करने पर विचार किया जाएगा। हालांकि, इसके लिए शोध प्रकाशन और अनुभव की स्पष्ट परिभाषा तय करने की जरूरत बताई गई है, ताकि प्रक्रिया में किसी तरह की अस्पष्टता या गलत लाभ की गुंजाइश न रहे।
अतिथि सहायक प्राध्यापकों के मुद्दे पर भी चर्चा
वार्ता के दौरान अतिथि सहायक प्राध्यापकों की मांगों को भी समिति के समक्ष रखने पर सहमति बनी। इनमें वर्तमान में कार्यरत संविदा सहायक प्राध्यापकों के समान न्यूनतम वेतनमान और उस पर महंगाई भत्ता देने की मांग शामिल है।
इसके अलावा सभी विश्वविद्यालयों में अतिथि सहायक प्राध्यापकों के नवीकरण की प्रक्रिया एक समान करने और उनके शैक्षणिक प्रमाणपत्र, शोध पत्र तथा अनुभव का उचित सत्यापन कराने की मांग भी रखी गई। छात्रों ने सत्यापन के बाद उन्हें 65 वर्ष की आयु तक सेवा का अवसर देने का सुझाव दिया है।
हर साल रिक्त पदों पर भर्ती का सुझाव
अनशनकारी छात्रों ने अधिकतम आयु सीमा में अचानक बदलाव करने के बजाय इसे चरणबद्ध तरीके से कम करने का सुझाव भी दिया। साथ ही नियमित रूप से हर साल रिक्त पदों के विरुद्ध सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति करने की मांग रखी गई है।
राज्यपाल के साथ हुई लंबी वार्ता के बाद छात्रों ने आंदोलन समाप्त करने का आश्वासन दिया है। अब निगाहें प्रस्तावित समिति के गठन और उसके बाद भर्ती नियमों में होने वाले संभावित बदलावों पर टिकी हैं।
वार्ता में शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी जीवन कुमार, अतिथि सहायक प्राध्यापक डॉ. कुंदन सिंह, डॉ. उमेश कुमार, डॉ. विभा रानी तथा शोधार्थी आशीष कुमार और मोनू कुमार राय शामिल रहे।