स्वामी राघवेंद्राचार्य त्रिदंडी आयुर्वेद महाविद्यालय में पुरातन छात्र मिलन समारोह का भव्य आयोजन, गुरुजनों से मिलकर भावुक हुए छात्र-छात्राएं
गया: गया जिले के करजरा स्थित स्वामी राघवेंद्राचार्य त्रिदंडी आयुर्वेद महाविद्यालय एवं चिकित्सालय में मंगलवार, 27 अक्टूबर को पुरातन छात्र मिलन समारोह का भव्य आयोजन किया गया। समारोह में वर्ष 1978 से लेकर 2026 तक के विभिन्न सत्रों के पूर्व छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। वर्षों बाद अपने शिक्षण संस्थान में लौटे पुरातन विद्यार्थियों ने पुराने सहपाठियों और गुरुजनों से मुलाकात कर अपनी शैक्षणिक स्मृतियों को ताजा किया। इस दौरान महाविद्यालय परिसर में उत्साह, आत्मीयता और भावुकता का माहौल देखने को मिला।
समारोह में बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद के सदस्य स्वामी विवेकानंद गिरि, महाविद्यालय के अध्यक्ष श्री शिव कैलाश डालमिया, सचिव स्वामी वेंकटेश प्रपन्नाचार्य जी महाराज, उपसचिव प्रद्युम्न सिंह, डॉ. कौशलेन्द्र प्रताप सिंह, डॉ. अनूप केडिया, डेल्टा इंटरनेशनल होटल के संचालक श्री संजय सिंह, महाविद्यालय के निदेशक डॉ. बशिष्ठ पांडेय और प्रभारी प्राचार्य डॉ. सत्येंद्र प्रसाद सिन्हा सहित महाविद्यालय के प्राध्यापक, छात्र-छात्राएं एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान अतिथियों और विशिष्ट व्यक्तियों को सम्मानित किया गया। वहीं, विभिन्न वर्षों में महाविद्यालय से शिक्षा प्राप्त कर चिकित्सा एवं आयुर्वेद के क्षेत्र में योगदान देने वाले पूर्व विद्यार्थियों के प्रति सम्मान व्यक्त किया गया। लंबे समय बाद एक साथ जुटे पुरातन छात्र-छात्राओं ने अपने विद्यार्थी जीवन के अनुभव साझा किए और महाविद्यालय से जुड़ी यादों को ताजा किया।
इस अवसर पर महाविद्यालय के सचिव स्वामी वेंकटेश प्रपन्नाचार्य जी महाराज ने पुरातन छात्र-छात्राओं को सम्मानित करते हुए उन्हें आशीर्वचन प्रदान किया। उन्होंने गुरु-शिष्य परंपरा की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए आयुर्वेद के प्रचार-प्रसार, मानव सेवा और अपने शिक्षण संस्थान के साथ आजीवन जुड़ाव बनाए रखने का संदेश दिया।
पुरातन छात्र मिलन समारोह ने महाविद्यालय की गौरवशाली शैक्षणिक परंपरा और गुरुजनों के प्रति सम्मान की भावना को एक बार फिर उजागर किया। इस आयोजन ने पूर्व एवं वर्तमान विद्यार्थियों के बीच आपसी संबंधों को मजबूत करने के साथ ही संस्थान की विरासत और उपलब्धियों को याद करने का अवसर प्रदान किया।
अंत में स्वामी वेंकटेश प्रपन्नाचार्य जी महाराज के आशीर्वचनों के साथ समारोह का समापन हुआ।