चुनावी रणनीतिकार का करोड़ों का साम्राज्य! PK के पास 96 करोड़, पत्नी उनसे भी ज्यादा अमीर, हलफनामे ने उड़ाए होश
Bihar news: बिहार की सियासत में हमेशा दूसरों की चुनावी किस्मत तय करने वाले और मशहूर चुनावी रणनीतिकार से राजनेता बने जन सुराज पार्टी (जेएसपी) के प्रणेता प्रशांत किशोर खुद पहली बार चुनावी मैदान में उतर चुके हैं. पटना की बेहद हाईप्रोफाइल मानी जाने वाली बांकीपुर विधानसभा सीट के उपचुनाव के लिए सोमवार को उन्होंने अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया. इस दौरान उन्होंने जो चुनावी एफिडेविट (शपथ पत्र) जमा किया है, उसने पिछले कई सालों से उनकी कुल कमाई और नेटवर्थ को लेकर चल रहे सस्पेंस को पूरी तरह खत्म कर दिया है. हलफनामे के मुताबिक, प्रशांत किशोर 96 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति के मालिक हैं, जबकि उनकी डॉक्टर पत्नी जाह्नवी दास की जायदाद तो उनसे भी आगे निकलकर 100 करोड़ रुपये के पार पहुंच गई है.
13 जुलाई की सुबह प्रशांत किशोर अपनी डॉक्टर पत्नी जाह्नवी दास के साथ सबसे पहले सोनपुर के प्रसिद्ध हरिहरनाथ मंदिर पहुंचे. वहां उन्होंने भगवान की विशेष पूजा-अर्चना की और उनका आशीर्वाद लिया. इसके बाद वे भारी संख्या में अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं के हुजूम के साथ पटना में नामांकन दाखिल करने पहुंचे. जब प्रशांत किशोर अपना पर्चा भर रहे थे, तब उनकी पत्नी डॉक्टर जाह्नवी दास उनकी कुर्सी पर हाथ टिकाकर बेहद मजबूती से उनके साथ खड़ी नजर आईं. आपको बता दें कि इस बेहद खास सीट पर 30 जुलाई को उपचुनाव के लिए वोट डाले जाएंगे और इसके नतीजे 3 अगस्त को सबके सामने आएंगे. यह सीट भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी.
चुनावी हलफनामे के आंकड़ों पर नजर डालें तो प्रशांत किशोर और उनकी पत्नी डॉक्टर जाह्नवी दास के पास कुल मिलाकर 198 करोड़ रुपये की भारी-भरकम संपत्ति है. अकेले प्रशांत किशोर के नाम पर 22.19 करोड़ रुपये की चल और 73.87 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति है, जो कुल मिलाकर 96.07 करोड़ रुपये होती है. हालांकि, पीके पर 5.77 करोड़ रुपये का कर्ज भी चल रहा है. दूसरी ओर, उनकी पत्नी जाह्नवी दास के पास 99.51 करोड़ रुपये की चल और 12.42 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति को मिलाकर कुल 101.93 करोड़ रुपये की जायदाद है. जाह्नवी दास के ऊपर भी 55 लाख रुपये का लोन है.
इस करोड़ों की संपत्ति के मालिक होने के बावजूद हलफनामे में एक बेहद हैरान करने वाली बात सामने आई है. प्रशांत किशोर के पास अपनी कोई निजी कार या गाड़ी नहीं है. नकदी की बात करें तो प्रशांत किशोर के पास महज 65 हजार 570 रुपये कैश हैं, जबकि उनकी पत्नी के पास 1 लाख 95 हजार 200 रुपये की नकदी है. हालांकि, उनके पास 7 करोड़ 36 लाख 24 हजार 202 रुपये का फिक्स डिपॉजिट (FD) मौजूद है. गहनों की बात करें तो पीके के पास सिर्फ 1 लाख 35 हजार रुपये की सोने की एक अंगूठी है, जबकि उनकी पत्नी के पास 64 लाख 12 हजार 500 रुपये के सोने के जेवर और 46 हजार रुपये की चांदी है. इसके अलावा उनके पास 7 अलग-अलग जगहों पर आलीशान बिल्डिंग या मकान हैं.
कमाई के मामले में प्रशांत किशोर ने शपथ पत्र में जानकारी दी है कि वित्त वर्ष 2024-25 में उनकी खुद की व्यक्तिगत कमाई 58 लाख 45 हजार 430 रुपये रही, जबकि उनकी पत्नी की आमदनी 40 लाख 23 हजार 800 रुपये दर्ज की गई. पीके ने टैक्स चुकाने के मामले में भी बड़ा रिकॉर्ड बनाया है. उन्होंने वित्त वर्ष 2020-21 से लेकर 2024-25 के बीच कुल 4.45 करोड़ रुपये का इनकम टैक्स और 5.58 करोड़ रुपये का भारी-भरकम जीएसटी सरकार को भरा है. इसके साथ ही उन्होंने अपनी जन सुराज पार्टी को वित्त वर्ष 2024-25 में 10 करोड़ रुपये का सीधा दान भी दिया है.
प्रशांत किशोर ने एफिडेविट में यह भी साफ किया है कि उनके पास 'वेदहास वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड' नाम की एक कंपनी है, जिसके 100 फीसदी कंट्रोलिंग शेयर उन्हीं के पास हैं. इसी कंपनी के माध्यम से उन्होंने साल 2024-25 के दौरान अपनी राजनीतिक पार्टी जन सुराज को 85 करोड़ रुपये और जन सुराज फाउंडेशन को 50 लाख रुपये का चंदा दिया था. इतना ही नहीं, साल 2023-24 में इसी कंपनी ने 'जॉय ऑफ गिविंग ग्लोबल फाउंडेशन' को भी 2.75 करोड़ रुपये की मदद दी थी. इससे पहले पिछले साल नवंबर में उन्होंने खुलासा किया था कि तीन साल के भीतर उन्होंने चुनावी सलाह देने के अपने पुराने काम से 241 करोड़ रुपये कमाए थे, जिसमें से 98 करोड़ रुपये उन्होंने जन सुराज को दे दिए थे. उन्होंने यह भी ऐलान किया है कि अगले 5 वर्षों तक वे अपनी होने वाली कमाई का 90 फीसद हिस्सा अपनी पार्टी को ही दान करते रहेंगे.
अगर पीके की पढ़ाई-लिखाई और कानूनी मामलों की बात करें, तो उन्होंने साल 1991 में 10वीं और 1993 में पटना के प्रतिष्ठित साइंस कॉलेज से 12वीं की पढ़ाई पूरी की थी. इसके बाद साल 1996 से 1999 के बीच उन्होंने लखनऊ यूनिवर्सिटी से अपना ग्रेजुएशन पूरा किया. उच्च शिक्षा के लिए वे विदेश गए और साल 2010 में उन्होंने फ्रांस की एक जानी-मानी यूनिवर्सिटी से अपनी बड़ी डिग्री हासिल की. राजनीति के इस सफर में प्रशांत किशोर के ऊपर अलग-अलग मामलों में कुल 8 पुलिस केस भी दर्ज हो चुके हैं.
कई बड़े राजनैतिक दलों को सत्ता के शिखर तक पहुंचाने वाले प्रशांत किशोर का खुद का यह पहला चुनाव है. वे इस चुनाव को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में चल रही एनडीए सरकार के कामकाज पर जनता के एक बड़े फैसले के रूप में भुना रहे हैं. पीके का साफ कहना है कि भाजपा को उसके सबसे मजबूत गढ़ में मात देने के लिए वे कोई कसर नहीं छोड़ेंगे और अगर बांकीपुर की जनता ने भाजपा को यहां हरा दिया, तो इस चुनावी नतीजे का सीधा संदेश और इसकी गूंज देश की राजधानी दिल्ली तक सुनाई देगी.
इस हाईप्रोफाइल सीट पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के भीतर भी काफी बड़ा ड्रामा देखने को मिला है. भाजपा ने पहले इस पारंपरिक सीट पर अपने युवा चेहरे अभिषेक बंटी को मैदान में उतारा था. बंटी ने अपना पर्चा भी भर दिया था और उनके समर्थन में डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी और संजय झा जैसे एनडीए के दिग्गजों ने जनसभा करके वोट भी मांग लिए थे. लेकिन अचानक बीते शुक्रवार को अभिषेक कुमार 'बंटी' ने हैरान करते हुए अपना नाम वापस ले लिया. इसके बाद भाजपा ने आनंद-फानन में पटना के एक युवा मंडल अध्यक्ष नीरज सिन्हा को अपना नया उम्मीदवार बनाया, जिन्होंने आज अपना नामांकन दाखिल कर दिया है.
बांकीपुर के चुनावी मैदान में वैसे तो 12 से भी ज्यादा उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, लेकिन जमीनी माहौल को देखते हुए असली और निर्णायक लड़ाई जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी प्रशांत किशोर, भाजपा के नीरज सिन्हा और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की उम्मीदवार रेखा गुप्ता के बीच मानी जा रही है. रेखा गुप्ता पिछले चुनाव में भी इसी सीट से लड़ी थीं, लेकिन उन्हें नितिन नवीन के हाथों एक बड़ी शिकस्त का सामना करना पड़ा था. गौरतलब है कि नितिन नवीन साल 2006 से इस सीट पर लगातार जीत दर्ज करते आ रहे हैं. साल 2006 में जब वे पहली बार अपने पिता के निधन के बाद चुनाव जीते थे, तब इस इलाके का नाम पटना पश्चिम हुआ करता था, जो साल 2008 के परिसीमन के बाद 2010 में बदलकर बांकीपुर हो गया. अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या पीके इस मजबूत गढ़ में सेंध लगा पाते हैं या नहीं.