गांव-गांव पहुंचेगा विकास का मंत्र! सहकारिता विभाग ने शुरू किया बड़ा मिशन, रोजगार और स्वरोजगार को मिलेगा नया बल
इस अवसर पर मंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर “सहकार से समृद्धि” के संकल्प को धरातल पर उतारने का काम कर रही हैं। सहकारिता अब केवल एक विभाग नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास, आत्मनिर्भरता और आर्थिक मजबूती का सशक्त माध्यम बन चुका है। सरकार का लक्ष्य है कि गांवों में ही रोजगार और आय के नए अवसर विकसित किए जाएं, ताकि युवाओं को पलायन न करना पड़े।
रामकृपाल यादव ने बताया कि बिहार में करीब 1.73 करोड़ किसान पैक्स से जुड़े हुए हैं। यदि किसानों तक सरकारी योजनाओं की सही जानकारी और प्रशिक्षण पहुंचे, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल सकती है। इसी उद्देश्य से मास्टर ट्रेनर तैयार किए जा रहे हैं, जो गांव-गांव जाकर किसानों और सहकारी संस्थाओं को प्रशिक्षित करेंगे।
उन्होंने कहा कि सरकार की विभिन्न योजनाएं जैसे कॉमन सर्विस सेंटर, प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र, किसान समृद्धि केंद्र, डोर स्टेप बैंकिंग, सफल सहायता योजना और गोदाम निर्माण योजना का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना बेहद जरूरी है। प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर इस दिशा में अहम भूमिका निभाएंगे।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में कृषि और गैर-कृषि क्षेत्रों में उपलब्ध नए अवसरों की भी जानकारी दी जा रही है। इसमें जैविक खेती, खाद्य प्रसंस्करण, औषधीय पौधों की खेती, सोलर प्लांट, पैकेजिंग उद्योग और डिजिटल तकनीक जैसे विषय शामिल हैं, ताकि ग्रामीण युवाओं और किसानों के लिए स्वरोजगार के नए रास्ते खुल सकें।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सहकारिता विभाग के सचिव धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि विभाग द्वारा सहकारिता प्रसार पदाधिकारियों, पैक्स अध्यक्षों और प्रबंधकों को राज्य के भीतर और बाहर प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे आधुनिक प्रबंधन और नई तकनीकों की जानकारी प्राप्त कर सकें।
वहीं सहयोग समितियों के निबंधक रजनीश कुमार सिंह ने बताया कि विभाग का लक्ष्य सहकारिता से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति को प्रशिक्षित करना है। मास्टर ट्रेनर अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर प्रबंधकारिणी समिति और सदस्यों को प्रशिक्षित करेंगे, जिससे प्रशिक्षण का लाभ व्यापक स्तर तक पहुंचेगा।
सहकारिता विभाग के अनुसार अब तक 256 मास्टर ट्रेनरों, 302 पीवीसीएस अध्यक्षों, 296 सहायक प्रबंधकों, 99 सब्जी पर्यवेक्षकों और 3,624 बोर्ड सदस्यों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। प्रशिक्षण में वैज्ञानिक खेती, उन्नत फसल प्रबंधन, कृषि आधारित मोबाइल एप, डिजिटल भुगतान प्रणाली और डिजिटल साक्षरता पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
सरकार का मानना है कि सहकारिता मॉडल को मजबूत कर गांवों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा सकता है। यही कारण है कि अब सहकारी संस्थाओं को ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भरता के सबसे प्रभावी माध्यम के रूप में विकसित करने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है।