‘तुलसी के राम’ कार्यक्रम में गूंजा श्रीराम के आदर्शों का संदेश, संजय सरावगी बोले- नई पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ना जरूरी
Bihar news: गोस्वामी तुलसीदास की जयंती सप्ताह के अवसर पर राजधानी पटना के रविंद्र भवन में ‘तुलसी के राम’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सनातन संस्कृति चेतना परिषद के तत्वावधान में हुए इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी भी शामिल हुए। शिक्षा मंत्री मिथिलेश कुमार तिवारी की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में श्रीराम के जीवन आदर्शों, तुलसीदास के साहित्य और भारतीय संस्कृति पर विचार रखे गए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संजय सरावगी ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास ने अपनी रचनाओं के जरिए भगवान श्रीराम के चरित्र को आम लोगों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया। उनके अनुसार तुलसीदास की वाणी में श्रीराम सिर्फ आराध्य नहीं हैं, बल्कि सत्य, मर्यादा, त्याग, करुणा, सेवा और कर्तव्य जैसे जीवन मूल्यों के प्रतीक भी हैं।
‘राम के आदर्श आज भी प्रासंगिक’
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि समय बदलने के बावजूद श्रीराम के जीवन से मिलने वाली सीख आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। समाज में बढ़ती चुनौतियों के बीच राम का चरित्र संयम, सद्भाव और कर्तव्य के रास्ते पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति को केवल पूजा-पद्धति तक सीमित नहीं किया जा सकता। यह ऐसी जीवन परंपरा है, जिसमें मानवता, संस्कार और सामाजिक समरसता को महत्व दिया गया है।
रामचरितमानस ने समाज को संस्कृति से जोड़ा
सरावगी ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस के माध्यम से भारतीय समाज को अपनी संस्कृति और संस्कारों से जोड़ने का काम किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में यह जरूरी है कि युवा पीढ़ी को तुलसीदास के साहित्य और भगवान श्रीराम के आदर्शों से परिचित कराया जाए।
उन्होंने कहा कि श्रीराम का जीवन परिवार से लेकर समाज और राष्ट्र तक जिम्मेदारी निभाने की प्रेरणा देता है। कठिन परिस्थितियों में भी सत्य और धर्म के मार्ग पर कायम रहना उनके चरित्र की सबसे बड़ी सीखों में से एक है।
‘सनातन संस्कृति चेतना और संस्कारों की परंपरा’
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि राम के आदर्शों को जीवन में उतारने से समाज में प्रेम, भाईचारा, सेवा और सद्भाव को मजबूती मिल सकती है। उन्होंने लोगों से श्रीराम के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लेने की अपील की।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की सांस्कृतिक विरासत को मजबूती मिलने की बात भी कही। सरावगी ने कहा कि बिहार की पहचान प्राचीन काल से ही ज्ञान, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना की भूमि के रूप में रही है। ऐसे आयोजन युवाओं को अपनी जड़ों और गौरवशाली परंपराओं से जोड़ने का माध्यम बनते हैं।
कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश संगठन महामंत्री भीखू भाई दलसानिया, कई विधायक, सनातन संस्कृति चेतना परिषद के अध्यक्ष मनीष शुक्ला समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु और रामभक्त मौजूद रहे।