बिहार में बदल जाएगी गांव की सरकार की तस्वीर! 8 हजार से बढ़कर 13 हजार हो सकती हैं पंचायतें, हजारों नए पदों पर नजर

 

Bihar news: बिहार में 2026 के अंत में होने वाले पंचायत चुनाव से पहले गांव की सरकार का पूरा चुनावी गणित बदलने के आसार हैं। मौजूदा पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल नवंबर-दिसंबर 2026 के आसपास समाप्त होना है। इससे पहले पंचायत चुनाव की तैयारी के साथ बड़े स्तर पर परिसीमन की प्रक्रिया प्रस्तावित है। नई सीमाएं तय होने के बाद कई पंचायतों का स्वरूप बदल सकता है और कुछ क्षेत्रों में नई ग्राम पंचायतों का गठन भी संभव है।

सबसे बड़ा बदलाव पंचायतों की संख्या को लेकर देखने को मिल सकता है। वर्तमान में बिहार में करीब 8,053 ग्राम पंचायतें हैं। परिसीमन के बाद यह संख्या बढ़कर लगभग 13 हजार तक पहुंचने का अनुमान है। ऐसा हुआ तो प्रदेश में करीब 5 हजार नई ग्राम पंचायतें बन सकती हैं। इसके साथ मुखिया, सरपंच और पंचायत स्तर के दूसरे पदों की संख्या में भी बड़ा इजाफा होगा।

8 हजार से बढ़कर करीब 13 हजार हो सकते हैं मुखिया के पद

पंचायतों की संख्या बढ़ने का सीधा असर मुखिया के पदों पर पड़ेगा। अभी करीब 8,053 मुखिया पद हैं, जबकि नई पंचायतों के गठन के बाद इनकी संख्या लगभग 13 हजार तक पहुंच सकती है। यानी मुखिया के पदों में करीब 60 फीसदी या उससे अधिक की बढ़ोतरी की संभावना है।

नई पंचायतों के साथ सरपंच और ग्राम कचहरी से जुड़े पदों की संख्या भी बढ़ सकती है। इसका मतलब है कि आगामी चुनाव में पंचायत राजनीति में नए पदों और नए चुनावी क्षेत्रों के रूप में दावेदारों के सामने बड़ी संभावनाएं खुल सकती हैं।

2011 की जनगणना बनेगी परिसीमन का आधार

पंचायतों और वार्डों की नई सीमाएं तय करने के लिए 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाए जाने की बात सामने आ रही है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत करीब 7 हजार की आबादी पर एक ग्राम पंचायत और लगभग 500 की आबादी पर एक वार्ड बनाने का प्रावधान बताया जा रहा है।

इस व्यवस्था के लागू होने पर ज्यादा आबादी वाली पंचायतों को विभाजित किया जा सकता है। वहीं, गांव और टोलों को भौगोलिक एवं आबादी की स्थिति के अनुसार दूसरी पंचायतों में शामिल किए जाने की संभावना भी रहेगी।

इसका सीधा असर ग्रामीण मतदाताओं पर पड़ेगा। जो मतदाता अभी जिस पंचायत में रहते हैं, जरूरी नहीं कि अगले पंचायत चुनाव में उनका पंचायत क्षेत्र वही रहे। परिसीमन के बाद पंचायत और वार्ड की सीमाएं बदलने पर उनका चुनावी क्षेत्र भी बदल सकता है।

आरक्षण का गणित भी बदल सकता है

परिसीमन के साथ पंचायत चुनाव में आरक्षण व्यवस्था का नया चक्र भी लागू होने की संभावना है। नई पंचायतों और वार्डों की सीमाएं तय होने के बाद आरक्षित सीटों का निर्धारण नए सिरे से किया जा सकता है।

ऐसे में 2021 के पंचायत चुनाव में जिस सीट पर किसी विशेष वर्ग के लिए आरक्षण था, अगले चुनाव में वही सीट उसी श्रेणी में रहे, यह जरूरी नहीं है। यही वजह है कि चुनाव की तैयारी कर रहे संभावित उम्मीदवारों की नजर अब परिसीमन के साथ-साथ आरक्षण की अंतिम सूची पर भी टिकी रहेगी।

राज्य निर्वाचन आयोग ने शुरू की तैयारी

पंचायत चुनाव को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग के स्तर पर भी तैयारियां शुरू होने की जानकारी है। परिसीमन की प्रक्रिया शुरू करने से पहले आयोग की ओर से विस्तृत दिशा-निर्देश और मानक तैयार किए जाएंगे। इसके बाद इन्हीं मानकों के आधार पर जिलों में पंचायतों और वार्डों का परिसीमन कराया जाएगा।

जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह-जिलाधिकारी के माध्यम से परिसीमन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाना है। इसे लेकर आयोग स्तर पर बैठकों का दौर भी शुरू हो चुका है।

2026 के अंत तक बदल सकता है गांवों का पूरा चुनावी नक्शा

पंचायती राज विभाग के मंत्री दीपक प्रकाश की ओर से भी समय पर पंचायत चुनाव कराने की तैयारी की बात कही गई है। हालांकि चुनाव की तारीख परिसीमन और उससे जुड़ी अन्य प्रक्रियाओं की प्रगति पर निर्भर करेगी।

अगर प्रस्तावित परिसीमन के बाद पंचायतों की संख्या करीब 13 हजार तक पहुंचती है, तो बिहार की ग्रामीण राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। नई पंचायतें बनेंगी, हजारों नए पद सामने आएंगे और कई मौजूदा पंचायतों की सीमाएं बदल जाएंगी।

यानी 2026 का पंचायत चुनाव सिर्फ नए प्रतिनिधियों के चुनाव तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह बिहार के गांवों की राजनीतिक और प्रशासनिक तस्वीर को नए सिरे से तय करने वाला चुनाव साबित हो सकता है।