मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना के तहत हजारों टोलों तक पहुंची सड़क; 8,033 किमी ग्रामीण सड़कों के निर्माण को मिली मंजूरी

 
Bihar news: बिहार के गांवों को बेहतर सड़क सुविधा से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना (अवशेष) के तहत राज्य के दूरदराज और अब तक सड़क से वंचित 2,078 बसावटों को पक्की सड़कों से जोड़ दिया गया है। इस पहल से हजारों ग्रामीणों को आवागमन में राहत मिली है और गांवों की आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिल रही है।

ग्रामीण कार्य विभाग की ओर से 100 या उससे अधिक आबादी वाले ऐसे टोलों और बसावटों को चिन्हित किया गया था, जो अब तक मुख्य सड़क मार्ग से नहीं जुड़े थे। इन क्षेत्रों में पक्की सड़कों के निर्माण का काम तेज़ी से किया जा रहा है, जिससे गांवों के लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य और बाजार तक पहुंच आसान हो सके।

मोबाइल ऐप से हुआ सर्वे, 11 हजार से अधिक बसावटें चिन्हित

राज्य सरकार ने छूटी हुई बसावटों की पहचान के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया। एक विशेष मोबाइल ऐप के माध्यम से पूरे राज्य में सर्वे कराया गया, जिसमें कुल 11,020 ऐसी बसावटों को चिन्हित किया गया जो अब तक सड़क संपर्क से वंचित थीं।

इन सभी बसावटों को बारहमासी सड़क से जोड़ने के लिए लगभग 14,002 किलोमीटर ग्रामीण सड़कों के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

8 हजार किलोमीटर से अधिक सड़कों को मिली मंजूरी

योजना के तहत अब तक 6,076 बसावटों को सड़क से जोड़ने के लिए प्रशासनिक स्वीकृति दी जा चुकी है। इसके लिए कुल 8,033.23 किलोमीटर लंबी ग्रामीण सड़कों के निर्माण का रास्ता साफ हुआ है।

इनमें से 2,078 बसावटों तक सड़क निर्माण का कार्य पूरा हो चुका है और करीब 2,210 किलोमीटर लंबी पक्की सड़कों का निर्माण किया जा चुका है।

पूर्वी चंपारण सबसे आगे

जिलावार प्रदर्शन की बात करें तो पूर्वी चंपारण इस योजना में सबसे आगे रहा है। यहां 239 बसावटों को करीब 300 किलोमीटर लंबी पक्की सड़कों से जोड़ा गया है।

इसके अलावा कैमूर में 195, औरंगाबाद में 161 और गया जिले में 149 बसावटों तक सड़क संपर्क सुनिश्चित किया गया है।

इन सड़कों के निर्माण से ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापार, खेती और परिवहन की गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है। विभाग का कहना है कि शेष बची बसावटों को भी तय समय सीमा के भीतर पक्की सड़कों से जोड़ने के लिए तेजी से काम जारी है, ताकि राज्य के हर गांव तक विकास की रफ्तार पहुंच सके।