बिहार में प्रशिक्षण से मजबूत हो रही पंचायतों की व्यवस्था, जनप्रतिनिधियों से लेकर कर्मियों तक बढ़ रही कार्यक्षमता

 

Bihar news: गांव के विकास की रफ्तार सिर्फ योजनाओं और बजट पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इस बात पर भी निर्भर करती है कि पंचायत स्तर पर जिम्मेदारी संभाल रहे जनप्रतिनिधि और कर्मचारी अपने काम को कितनी बेहतर तरीके से समझते हैं। बिहार में पंचायतों को इसी स्तर पर मजबूत करने के लिए जनप्रतिनिधियों और पंचायत कर्मियों को लगातार प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

पंचायती राज विभाग और बिहार राज्य पंचायत संसाधन संस्था (BSPRI) के माध्यम से आयोजित इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों का उद्देश्य पंचायत स्तर पर काम करने वाले लोगों की क्षमता बढ़ाना है। प्रशिक्षण के जरिए उन्हें सरकारी योजनाओं, पंचायत संचालन, विकास की योजना तैयार करने और उसके प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़ी जानकारी दी जा रही है।

सिर्फ ट्रेनिंग नहीं, काम करने का तरीका भी बदलने पर जोर

प्रशिक्षण कार्यक्रमों को इस तरह तैयार किया गया है कि जनप्रतिनिधि और पंचायत कर्मी सिर्फ योजनाओं की जानकारी हासिल न करें, बल्कि उसे जमीन पर लागू करने की कार्यप्रणाली भी समझें।

विभाग का फोकस परिणाम आधारित, विषय आधारित और निरंतर प्रशिक्षण पर है। इसका उद्देश्य ग्राम पंचायतों में सुशासन, पारदर्शिता और लोगों की भागीदारी को मजबूत करना है। साथ ही स्थानीय स्तर पर सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने में पंचायतों की भूमिका को प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

Cascade Mode में गांव तक पहुंच रही ट्रेनिंग

पंचायत प्रतिनिधियों और कर्मियों तक प्रशिक्षण पहुंचाने के लिए Cascade Mode अपनाया गया है। यानी प्रशिक्षण एक स्तर से दूसरे स्तर तक चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ता है।

सबसे पहले राज्य स्तर पर कार्यशाला और Training of Trainers (ToT) आयोजित किया जाता है। इसके बाद जिला स्तर पर प्रखंडों में प्रशिक्षण देने वाले प्रशिक्षकों की ट्रेनिंग कराई जाती है। जिला स्तर पर कार्यशाला और प्रशिक्षण के बाद यही प्रक्रिया प्रखंड स्तर तक पहुंचती है।

अंतिम चरण में प्रखंड स्तर पर जनप्रतिनिधियों और पंचायत कर्मियों को प्रशिक्षण दिया जाता है। इस व्यवस्था से एक साथ बड़ी संख्या में लोगों को प्रशिक्षित करने और प्रशिक्षण की प्रक्रिया को पंचायत स्तर तक ले जाने में मदद मिलती है।

विकास योजनाओं की बेहतर प्लानिंग में मिल रही मदद

प्रशिक्षण से पंचायत स्तर पर विकास योजनाओं को तैयार करने और लागू करने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मदद मिल रही है। पंचायत कर्मियों का कहना है कि ट्रेनिंग के जरिए योजनाओं और उनके क्रियान्वयन से जुड़ी प्रक्रियाओं को समझना आसान हुआ है।

प्रखंड कार्यपालक सहायक विकास रजक के मुताबिक, प्रशिक्षण से पंचायतों में विकास योजनाओं के बेहतर और प्रभावी निर्माण में मदद मिल रही है। इससे पंचायत स्तर पर योजनाओं को जमीन पर उतारने की क्षमता भी बढ़ रही है।

जनकल्याणकारी योजनाओं को लोगों तक पहुंचाने में मदद

लेखपाल-सह-आईटी सहायक कंचन कुमारी का कहना है कि प्रशिक्षण से जनप्रतिनिधियों और कर्मियों की क्षमता लगातार बढ़ रही है। इससे पंचायत स्तर पर जनप्रतिनिधियों के साथ समन्वय बनाकर सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करने में मदद मिल रही है।

वहीं पंचायत सचिव विजय कुमार के अनुसार, जिला स्तर पर होने वाले नियमित प्रशिक्षण से पंचायतों में काम करने वाले प्रतिनिधियों और कर्मियों की क्षमता मजबूत हो रही है। इसका सीधा उद्देश्य सरकारी योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन और उनका लाभ आम लोगों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना है।

बेहतर संचालन और विकास कार्यों को गति देने पर फोकस

लेखपाल-सह-आईटी सहायक पूजा कुमारी ने प्रशिक्षण कार्यक्रमों को पंचायतों के लिए उपयोगी बताया। उनके अनुसार, इन प्रशिक्षणों से पंचायतों के संचालन, काम करने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने और विकास कार्यों को गति देने में सहयोग मिल रहा है।

पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कदम

बिहार में पंचायत स्तर पर लगातार प्रशिक्षण की यह व्यवस्था सिर्फ कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं है। इसका व्यापक उद्देश्य स्थानीय स्तर पर ऐसी व्यवस्था तैयार करना है, जहां जनप्रतिनिधि और पंचायत कर्मी योजनाओं को समझकर बेहतर निर्णय ले सकें और विकास कार्यों को अधिक प्रभावी तरीके से लागू कर सकें।

यानी प्रशिक्षण के जरिए पंचायतों में बेहतर योजना, पारदर्शी व्यवस्था, जनभागीदारी और प्रभावी क्रियान्वयन की नींव मजबूत करने की कोशिश की जा रही है। यही क्षमता आने वाले समय में गांवों के विकास और पंचायतों के सशक्तीकरण की अहम कड़ी बन सकती है।