गांव ने खोया लाल, शौर्य और बलिदान को किया नमन, पार्थिव शरीर से लिपटकर रोई पत्नी..गूंजे भारत माता की जय के नारे, हर आंख हुई नम...
Nalanda: नालंदा की धरती उस वक्त गम और गर्व के मिले-जुले भाव से भर उठी, जब देश के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीर सपूत का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा। तिरंगे में लिपटा शहीद का शव जैसे ही घर के आंगन में रखा गया, माहौल पूरी तरह भावुक हो गया। पत्नी अपने आंसुओं को रोक नहीं सकीं और पार्थिव शरीर से लिपटकर फूट-फूट कर रो पड़ीं। यह दृश्य देख वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं।
गांव ने खोया अपना बेटा
शहीद के अंतिम दर्शन के लिए गांव के लोग सुबह से ही सड़कों पर उमड़ पड़े थे। बुजुर्गों से लेकर बच्चों तक, हर कोई अपने लाल को अंतिम विदाई देने पहुंचा। जैसे ही शव यात्रा शुरू हुई, गांव की छतों से लोगों ने फूल बरसाए। पूरा रास्ता भारत माता की जय और शहीद अमर रहें के नारों से गूंज उठा।
पत्नी का दर्द और गर्व
शहीद की पत्नी कभी आंसुओं में डूबी नजर आईं तो कभी गर्व के साथ तिरंगे को निहारती रहीं। उनका कहना था कि उन्हें अपने पति के बलिदान पर गर्व है, लेकिन इस खालीपन को शब्दों में बयान करना मुश्किल है। परिवार के अन्य सदस्य भी खुद को संभाल नहीं पा रहे थे।
राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार
प्रशासन और सुरक्षा बलों की मौजूदगी में शहीद को राजकीय सम्मान दिया गया। सलामी दी गई, तिरंगा परिवार को सौंपा गया और पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई। इस दौरान मौजूद अधिकारियों ने कहा कि शहीद का बलिदान कभी भुलाया नहीं जाएगा और सरकार परिवार के साथ हर संभव सहयोग करेगी।
पूरे इलाके में शोक की लहर
शहीद की शहादत की खबर फैलते ही पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। स्थानीय लोगों ने इसे नालंदा ही नहीं, बल्कि पूरे देश की क्षति बताया। हर जुबान पर एक ही बात थी—देश के लिए जान देने वाला यह वीर सपूत हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेगा।
शहीद की यह अंतिम यात्रा सिर्फ एक विदाई नहीं थी, बल्कि यह उस जज्बे और बलिदान का प्रतीक थी, जो देश की सुरक्षा के लिए हर दिन हमारे जवान दिखाते हैं। नालंदा ने अपने बेटे को खोया जरूर है, लेकिन उसके साहस और शौर्य की कहानी हमेशा अमर रहेगी