आरक्षण खत्म करने की नहीं, उसका लाभ सबसे वंचित तक पहुंचाने की जरूरत: संतोष सुमन

 

Bihar: देश में आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा और उसमें बदलाव को लेकर चल रही बहस के बीच बिहार के मंत्री एवं हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) के नेता संतोष कुमार सुमन ने आरक्षण को लेकर अपनी पार्टी का रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि आरक्षण की समीक्षा का मतलब इसे समाप्त करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि इसका लाभ समाज के वास्तविक रूप से वंचित वर्गों तक पहुंचे।

संतोष सुमन ने सोशल मीडिया के जरिए कहा कि उनकी पार्टी अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के आरक्षण में उप-वर्गीकरण से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पहले भी समर्थन करती रही है और आगे भी इसके पक्ष में है। उन्होंने सवाल उठाया कि आजादी के करीब आठ दशक बाद अगर यह आकलन किया जाए कि आरक्षण का लाभ किन वर्गों को कितना मिला और कौन-से समुदाय अब भी पीछे हैं, तो इसमें आपत्ति की क्या वजह है।

दलित समाज को एकरूप मानना उचित नहीं: संतोष सुमन

हम नेता ने कहा कि दलित समाज के भीतर भी सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक स्थिति समान नहीं है। कुछ समुदायों को आरक्षण का लाभ अपेक्षाकृत अधिक मिला हो सकता है, जबकि कई वर्ग अब भी अवसरों से दूर हैं। ऐसे में सबसे वंचित लोगों तक आरक्षण का लाभ पहुंचाने के लिए व्यवस्था पर विचार किया जाना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि देश में पहले भी बड़े सामाजिक वर्गों के भीतर जरूरत के आधार पर अलग-अलग श्रेणियां बनाई गई हैं। सामान्य वर्ग में आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए ईडब्ल्यूएस और पिछड़े वर्गों में पिछड़ा तथा अतिपिछड़ा जैसी श्रेणियों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि इसी तर्ज पर दलित समाज के भीतर भी वास्तविक वंचितों की स्थिति पर विचार किया जा सकता है।

उप-वर्गीकरण को बताया सामाजिक न्याय का रास्ता

संतोष सुमन ने स्पष्ट किया कि उप-वर्गीकरण का उद्देश्य आरक्षण को कमजोर करना या खत्म करना नहीं, बल्कि उसकी पहुंच को अधिक न्यायपूर्ण बनाना है। उनका कहना है कि यदि आरक्षण का लाभ समाज के उन लोगों तक पहुंचता है, जो आज भी सबसे पीछे हैं, तो इससे सामाजिक न्याय की मूल भावना मजबूत होगी।

उन्होंने कहा कि आरक्षण व्यवस्था को बनाए रखने के साथ यह भी जरूरी है कि उसका लाभ वास्तविक हकदारों तक पहुंचे। उनके मुताबिक यही व्यवस्था बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा दिए गए संवैधानिक अधिकार की भावना के अनुरूप होगी।

आरक्षण की पहुंच पर नए सिरे से बहस

संतोष सुमन के इस बयान के बाद आरक्षण व्यवस्था में लाभ के समान वितरण और उप-वर्गीकरण को लेकर बहस एक बार फिर तेज होने के संकेत हैं। एक ओर आरक्षण की मौजूदा व्यवस्था को लेकर चर्चा जारी है, वहीं दूसरी ओर उसके लाभ को अधिक वंचित वर्गों तक पहुंचाने की मांग भी सामने आ रही है।

फिलहाल संतोष सुमन ने अपने बयान के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की है कि आरक्षण की समीक्षा को उसके अंत की तरह नहीं, बल्कि उसके लाभ को अधिक न्यायपूर्ण तरीके से बांटने की प्रक्रिया के रूप में देखा जाना चाहिए।