बिहार के छात्रों की परेशानी का अब होगा डिजिटल समाधान, CM सम्राट चौधरी ने लॉन्च किया ‘विद्यार्थी सहयोग पोर्टल’

 

Patna: बिहार के विद्यार्थियों को शैक्षणिक और छात्रावास से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए अब अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत कम होगी। राज्य सरकार ने छात्रों की शिकायतों को सीधे प्रशासन तक पहुंचाने के लिए ‘विद्यार्थी सहयोग पोर्टल’ शुरू किया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को पटना के जेडी वूमेंस कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम के दौरान इस डिजिटल प्लेटफॉर्म का शुभारंभ किया।

इस पोर्टल पर विद्यार्थी पढ़ाई, परीक्षा, नामांकन, प्रमाणपत्र, कॉलेज से जुड़ी प्रशासनिक परेशानियों के साथ-साथ हॉस्टल की समस्याओं और अपने सुझाव भी ऑनलाइन दर्ज करा सकेंगे। शिकायत मिलने के बाद उसे संबंधित विभाग या अधिकारी तक पहुंचाने की व्यवस्था होगी। सरकार का उद्देश्य एक ऐसी केंद्रीकृत व्यवस्था तैयार करना है, जहां छात्रों की समस्याओं को दर्ज करने से लेकर उनके समाधान तक की प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से ट्रैक किया जा सके।

सरकारी और निजी संस्थानों के छात्र उठा सकेंगे लाभ

पोर्टल का दायरा केवल सरकारी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों तक सीमित नहीं रखा गया है। सरकारी और निजी शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थी भी अपनी शैक्षणिक और छात्रावास संबंधी शिकायतें दर्ज करा सकेंगे। इसके जरिए सरकार को यह समझने में भी मदद मिलेगी कि छात्रों के सामने किस तरह की समस्याएं बार-बार आ रही हैं और किन क्षेत्रों में नीतिगत सुधार की जरूरत है।

मदद के लिए 1100 हेल्पलाइन

पोर्टल से जुड़ी जानकारी या ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने में किसी तरह की परेशानी होने पर विद्यार्थी 1100 नंबर पर संपर्क कर सकेंगे। हेल्पलाइन के जरिए पोर्टल के इस्तेमाल और विद्यार्थी सहयोग शिविर से संबंधित जानकारी भी हासिल की जा सकेगी।

30 दिनों में शिकायत निपटाने का दावा

सरकार के अनुसार पोर्टल पर दर्ज शिकायतों के निपटारे के लिए 30 दिनों की समयसीमा तय की गई है। शिकायत के समाधान के बाद संबंधित विद्यार्थी को इसकी सूचना भी देने की व्यवस्था होगी। इससे छात्रों को अपनी शिकायत की स्थिति जानने में सुविधा मिलने और प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है।

हालांकि पोर्टल की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि शिकायतों पर जमीनी स्तर पर कितनी तेजी से कार्रवाई होती है और छात्रों को समाधान की जानकारी कितनी पारदर्शिता के साथ मिलती है। सरकार की कोशिश है कि विद्यार्थियों की समस्याएं अलग-अलग विभागों के बीच भटकने के बजाय एक ही डिजिटल सिस्टम के जरिए सही अधिकारी तक पहुंचें और समयबद्ध समाधान की प्रक्रिया शुरू हो।