बच्चों के इलाज के दौरान हंगामा! सहरसा सदर अस्पताल में डॉक्टर-पत्रकार आमने-सामने
सहरसा से सागर कुमार की रिपोर्ट
Saharsa: सहरसा सदर अस्पताल में बच्चों के इलाज के दौरान चिकित्सकों और पत्रकारों के बीच हुए विवाद को लेकर अस्पताल प्रशासन ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है। अस्पताल अधीक्षक के अनुसार, 12 सितंबर को कहरा प्रखंड से मिड-डे-मील खाने के बाद बीमार हुए बच्चों को इलाज के लिए सदर अस्पताल लाया गया था। बच्चों का चिकित्सकीय उपचार और निगरानी की जा रही थी। इसी दौरान कुछ मीडिया कर्मियों द्वारा बिना पूर्व अनुमति बच्चों और उनके परिजनों से बयान लेने का प्रयास किए जाने की बात अस्पताल प्रशासन ने कही है।
अस्पताल प्रशासन का दावा है कि मीडिया कर्मियों की मौजूदगी से बच्चों के इलाज में परेशानी उत्पन्न हो रही थी। इसके बाद प्रभारी अधीक्षक और अन्य चिकित्सकों ने पत्रकारों से आपातकालीन वार्ड से बाहर जाने का अनुरोध किया।
बाहर जाने को लेकर हुआ विवाद
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, अनुरोध के बावजूद कुछ पत्रकार आपातकालीन वार्ड से बाहर नहीं गए, जिसके बाद विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई। अस्पताल की ओर से जारी पक्ष में आरोप लगाया गया है कि इस दौरान अभिषेक कुमार ने प्रभारी अधीक्षक से कथित तौर पर आपत्तिजनक भाषा में बातचीत की।
अस्पताल प्रशासन ने प्रभारी अधीक्षक, चिकित्सकों और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार और गाली-गलौज का भी आरोप लगाया है।
इमरजेंसी वार्ड का दरवाजा और शीशा टूटने का आरोप
अस्पताल प्रशासन ने अपने पक्ष में दावा किया है कि विवाद के बाद आपातकालीन वार्ड से बाहर निकलने के दौरान वार्ड का दरवाजा और शीशा टूट गया। पत्र में इस घटना में चेतन कुमार नामक पत्रकार के भी शामिल होने की बात कही गई है।
अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, घटना के दौरान अस्पताल परिसर में अफरातफरी का माहौल बन गया। भर्ती मरीजों और स्वास्थ्य कर्मियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
मारपीट में कर्मियों के घायल होने का दावा
अस्पताल प्रशासन ने यह भी आरोप लगाया है कि विवाद के दौरान मारपीट की स्थिति बनी, जिसमें कई स्वास्थ्य कर्मियों को चोटें आईं। घटना की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय थाना और सहरसा के जिला पदाधिकारी को फोन के माध्यम से सूचना दी गई।
सूचना मिलने के बाद पुलिस बल सदर अस्पताल पहुंचा और स्थिति को नियंत्रित किया। इसके बाद अस्पताल परिसर में स्थिति सामान्य कराई गई।
पत्रकारों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए आवेदन
अस्पताल प्रशासन ने घटना में शामिल बताए जा रहे पत्रकारों के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा डालने, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने तथा प्रभारी अधीक्षक के साथ कथित गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार के आरोप लगाए हैं।
अस्पताल प्रशासन की ओर से इन आरोपों को लेकर सदर थाना के थानाध्यक्ष को आवश्यक कानूनी कार्रवाई के लिए आवेदन सौंपे जाने की बात कही गई है।
मामले में आगे क्या?
फिलहाल अस्पताल प्रशासन ने घटना को लेकर अपना पक्ष पुलिस के समक्ष रख दिया है। अब मामले में पुलिस की जांच के बाद ही विवाद की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। वहीं, बच्चों के इलाज के दौरान हुई इस घटना ने अस्पताल में मरीजों की चिकित्सा व्यवस्था और मीडिया कवरेज के बीच समन्वय को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।