CSR में बिहार की ‘अनदेखी’ पर उठी आवाज: चैम्बर ने वित्त मंत्री से मांगा बड़ा हिस्सा, विकास कार्यों पर जताई चिंता
चैम्बर ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर कहा है कि बिहार जैसे बड़े और पिछड़े राज्य को CSR फंड में पर्याप्त हिस्सा नहीं मिल रहा, जिससे कई अहम विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
चैम्बर अध्यक्ष पी के अग्रवाल ने बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर CSR खर्च लगातार बढ़ रहा है, लेकिन बिहार की हिस्सेदारी बेहद कम है। आंकड़ों के मुताबिक, जहां देशभर में CSR के तहत हजारों करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं, वहीं बिहार को इसका महज 0.66% से 0.78% तक ही हिस्सा मिल पाया है।
उन्होंने कहा कि इस कम हिस्सेदारी का सीधा असर राज्य में स्वास्थ्य, स्वच्छता, पेयजल, शिक्षा, अनाथ बच्चों के आश्रय, खेल और आपदा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर पड़ रहा है।
चैम्बर का कहना है कि बिहार देश की लगभग 9% आबादी का प्रतिनिधित्व करता है, ऐसे में CSR फंड में राज्य की हिस्सेदारी बढ़ाना बेहद जरूरी है। इससे केंद्र की ‘पूर्वोदय’ योजना को भी मजबूती मिलेगी और पूर्वी भारत के विकास को गति मिल सकेगी।
चैम्बर ने यह भी सुझाव दिया है कि अगर जरूरत पड़े तो CSR से जुड़े कानून में संशोधन कर बिहार जैसे राज्यों के लिए विशेष प्रावधान किए जाएं, ताकि विकास कार्यों को नई रफ्तार मिल सके।
फिलहाल, यह मांग राज्य के विकास और संसाधनों के बेहतर वितरण को लेकर एक बड़ी बहस को जन्म दे रही है।