गर्मी से पहले ‘वॉटर अलर्ट’! हर पंचायत का होगा सर्वे, मरम्मति दल और वैकल्पिक जल स्रोत की तैयारी तेज
बैठक में सभी क्षेत्रीय मुख्य अभियंता और अधीक्षण अभियंता मौजूद रहे, जबकि संवेदनशील इलाकों के कार्यपालक अभियंता वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े।
अगले सप्ताह से रवाना होंगे चलंत मरम्मति दल
सचिव ने निर्देश दिया कि ग्रीष्मकालीन संकट से निपटने के लिए चलंत मरम्मति दल अगले सप्ताह से जिलों में रवाना किए जाएं। जिला पदाधिकारी इन्हें हरी झंडी दिखाकर भेजेंगे।
मरम्मति दलों की पर्याप्त संख्या सुनिश्चित करने, उनकी तैनाती का रिकॉर्ड विभागीय एमआईएस प्रणाली में दर्ज करने और आवश्यक संसाधनों का प्रस्ताव तत्काल मुख्यालय को भेजने को कहा गया।
15 मार्च तक हर पंचायत का फील्ड सर्वे
गर्मी की पूर्व तैयारी के तहत सभी कार्यपालक और अधीक्षण अभियंताओं को 15 मार्च तक अपने-अपने क्षेत्रों की प्रत्येक पंचायत का अनिवार्य भ्रमण करने का निर्देश दिया गया है।
इस दौरान जलापूर्ति की जमीनी स्थिति का आकलन कर संभावित समस्या-ग्रस्त पंचायतों और टोलों की पहचान की जाएगी। जहां ‘हर घर नल का जल’ योजना की अवसंरचना अधूरी है, वहां वैकल्पिक स्रोत के रूप में नए चापाकल लगाए जाएंगे।
चापाकल स्थापना का निर्णय जलस्तर, फील्ड सर्वे और जिला प्रशासन से समन्वय के आधार पर लिया जाएगा।
टैंकर, वाटर एटीएम और मेंटेनेंस की भी समीक्षा
बैठक में ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस अनुबंधों, टैंकर परिचालन, वाटर एटीएम की कार्यशीलता और जलापूर्ति योजनाओं के रख-रखाव की स्थिति की भी समीक्षा की गई।
जिन योजनाओं के अनुबंध की अवधि समाप्त होने वाली है, वहां नए संवेदक के चयन तक पुराने संवेदक को समय विस्तार देने का निर्देश दिया गया, ताकि जलापूर्ति प्रभावित न हो।
पंप ऑपरेटरों के भुगतान पर सख्त रुख
सचिव ने स्पष्ट किया कि पंप ऑपरेटरों का समय पर भुगतान संबंधित कार्यपालक अभियंताओं की सीधी जिम्मेदारी है। लंबित भुगतान शीघ्र निपटाने के लिए जिला पंचायती राज पदाधिकारियों से समन्वय करने और जरूरत पड़ने पर जिला पदाधिकारी से सहयोग लेने को कहा गया।
उन्होंने कहा कि योजनाओं के सुचारु संचालन में पंप ऑपरेटरों की भूमिका अहम है, इसलिए उनके भुगतान को उच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
शिकायतों पर होगी कड़ी कार्रवाई
केंद्रीकृत शिकायत निवारण प्रणाली (CGRC) के तहत लंबित शिकायतों पर भी नाराजगी जताई गई। तय समय-सीमा से अधिक लंबित मामलों में संबंधित अभियंताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई।
साथ ही मुख्यालय स्तर पर अलग-अलग टीमों का गठन कर फील्ड में भेजने का निर्णय लिया गया, ताकि गर्मी से जुड़ी तैयारियों की जमीनी निगरानी सुनिश्चित हो सके।