बिहार का हक कब मिलेगा?- ₹1.79 लाख करोड़ पैकेज को लेकर संसद में गूंजे सवाल, NDA पर RJD का सीधा वार
हालांकि, उस समय राष्ट्रीय जनता दल अध्यक्ष श्री लालू प्रसाद यादव जी एवं बिहार की तत्कालीन मुख्यमंत्री श्रीमती राबड़ी देवी जी ने बिहार के लिए 1 लाख 79 हजार 900 करोड़ रूपए के विशेष वित्तीय पैकेज की मांग की थी। उस वक्त राजद की इस मांग का कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, वामपंथी पार्टियों सहित वर्तमान नीतीश कुमार जी की पार्टी समता पार्टी ने भी समर्थन किया था।
बिहार को आज तक वह 1,79,900 करोड़ का वित्तीय पैकेज, जो उसका अधिकार है, नहीं मिला है जबकि बिहार में विगत 21 वर्षों से और केंद्र में 12 वर्षों से एनडीए की सरकार है।
आज केंद्र की मोदी सरकार बिहार और आंध्र प्रदेश के बल पर चल रही है। TDP बधाई की पात्र है कि पिछले दो सालों में वह आंध्र प्रदेश के लिए 2 लाख करोड़ से अधिक की वित्तीय सहायता राशि और कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट केंद्र सरकार से लेने में सफल रही हैं। इतना ही नहीं आज TDP ने केंद्र सरकार को विवश किया है कि आंध्र प्रदेश पुनर्गठन कानून में अपने राज्य के हित को देखते हुए संशोधन करे।
माननीय सांसद ने पूछा कि बिहार के NDA सांसद आज क्या कर रहे हैं? बिहार के लिए विशेष राज्य के दर्जे और विशेष पैकेज की बजाय उन्हें एक मखाना बोर्ड जो कि पहले से चल रहा था उसी से बहला दिया गया है। JDU के सांसदों को TDP के सांसदों से कुछ सीखना चाहिए कि लड़कर कैसे अपने प्रदेश का हक लिया जाता है। बिहार को कुछ देना तो दूर अब तो बिहार से जेडीयू के मुख्यमंत्री को भी हटाने की सारी कवायद पूरी हो चुकी है।
टीडीपी की तरह जेडीयू को बिहार की बेहतरी के लिए अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए वर्षों से लंबित 1 लाख 79 हजार 9 सौ करोड़ रूपए का पैकेज सुनिश्चित करने में अपनी भूमिका निभानी चाहिए। गौरतलब है कि मुद्रास्फीति को देखते हुए आज यह राशि कहीं अधिक बड़ी हो चुकी है।
माननीय सांसद श्री संजय यादव जी ने कहा कि राज्य पुनर्गठन कानून में संशोधन का आधार जनमत संग्रह होना चाहिए क्योंकि कल कोई और पार्टी अगर सत्ता में आ जाए तो वह राजधानी को लेकर फिर से एक नया संशोधन लेकर आ सकती है।