जहां पानी बना था परेशानी, वहीं उगा ‘सोना’- मखाना खेती ने बदली सहरसा के किसानों की तकदीर

 
Bihar news: बिहार के सहरसा जिले के सहसौल पंचायत में एक अनोखी मिसाल सामने आई है, जहां सालों से जलभराव से जूझ रही जमीन अब किसानों के लिए कमाई का ‘खजाना’ बन गई है। यहां के किसानों ने समस्या को अवसर में बदलते हुए मखाना की खेती शुरू की और आज वही जमीन उनकी आर्थिक मजबूती का आधार बन चुकी है।

जलभराव से जंग, अब बनी आय का जरिया

पहले जिन खेतों में पानी भरने के कारण खेती असंभव थी, अब वहीं पोखर बनाकर मखाना की खेती की जा रही है। गांव के 19 किसानों ने इस पहल से न केवल अपनी जिंदगी बदली, बल्कि पूरे इलाके के लिए नई राह भी दिखाई।

कम खर्च, तिगुना मुनाफा

किसान गणेश कुमार महतो बताते हैं कि मखाना खेती में करीब 15 हजार रुपये तक खर्च आता है, जबकि इससे तीन गुना तक मुनाफा हो रहा है। बाजार में मखाना 600 से 1200 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है, जिससे हर किसान सालाना करीब 50 हजार रुपये तक की अतिरिक्त कमाई कर रहा है।

जल-जीवन-हरियाली से मिली नई दिशा

ग्रामीण विकास विभाग की ‘जल-जीवन-हरियाली’ अभियान ने इस बदलाव में अहम भूमिका निभाई। मनरेगा के सहयोग से बेकार पड़ी जमीन को तालाब में बदला गया और फिर मखाना उत्पादन शुरू हुआ।

पर्यावरण और रोजगार दोनों को फायदा

इस पहल से जहां किसानों की आमदनी बढ़ी है, वहीं गांव में जल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन को भी मजबूती मिली है। नए पोखरों के निर्माण से जल स्तर बेहतर हुआ और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं।

सरकार का भी फोकस

ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि मखाना खेती राज्य में आत्मनिर्भरता का बड़ा माध्यम बन रही है। सरकार उन्नत बीज और टूल्स किट पर अनुदान देकर किसानों को प्रोत्साहित कर रही है।